कोलकाता की व्यस्त सड़कों पर जब गाड़ियां दौड़ती हैं, तब वहां खाकी वर्दी में एक पुलिस अफसर सिर्फ ट्रैफिक ही नहीं संभालता. वह सड़क किनारे फुटपाथ पर बैठकर एक बेबस बच्चे की किस्मत भी लिख रहा होता है. कोलकाता पुलिस के सार्जेंट प्रकाश घोष की यह कहानी सोशल मीडिया पर हर किसी का दिल जीत रही है. नौ साल पहले पुलिस सेवा में आए प्रकाश घोष पिछले पांच सालों से साउथ प्वाइंट स्कूल के पास ट्रैफिक व्यवस्था संभालते हैं. गरियाहाट और बालीगंज आईटीआई के पास ड्यूटी के दौरान उन्होंने देखा कि आठ साल का एक बच्चा सड़क पर भटक रहा है. बच्चे की मां पास ही एक छोटा सा फूड स्टॉल लगाकर दिन-रात मेहनत करती है. दोनों के सिर पर छत नहीं है और वे फुटपाथ पर रहते हैं. इस मजबूरी को देखकर पुलिस अफसर का दिल पसीज गया. उन्होंने तय किया कि वह इस मासूम को सड़क की गर्दिश में खोने नहीं देंगे.
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प्रकाश घोष ने पुलिस में आने से पहले मुर्शिदाबाद के जंगीपुर में एक स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया था. उन्होंने शिक्षा में मास्टर डिग्री यानी एमएड की पढ़ाई पूरी की है. वर्दी पहनने के बाद भी उनके भीतर का शिक्षक हमेशा जिंदा रहा. ड्यूटी के दौरान उन्होंने देखा कि नौ साल का आकाश राउत सड़क पर खेलता रहता है. आकाश की मां सुनीता सड़क किनारे ठेला लगाकर रोजाना महज 150 से 200 रुपये कमाती हैं. करीब डेढ़ साल पहले आकाश के पिता का देहांत हो गया था, जो आईटीआई में काम करते थे. इसके बाद परिवार बिखर गया और मां-बेटे को फुटपाथ पर आसरा लेना पड़ा. जब प्रकाश घोष ने मां से बात की, तो पता चला कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद होने से आकाश की पढ़ाई पूरी तरह छूट चुकी थी. वह अक्षर और बेसिक चीजें भूल चुका था. मां के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बच्चे को ट्यूशन भेज सके. बस इसी दर्द को समझकर सार्जेंट प्रकाश घोष ने सड़क किनारे ही बच्चे की क्लास शुरू कर दी.





