बाड़मेर बाड़मेर जिले के सांखली गांव के युवा डूंगरसिंह सोढ़ा ने बिजली कटौती की समस्या का समाधान खोजते हुए एक अनूठी स्मॉल विंड टर्बाइन विकसित की है। उनकी बनाई पोर्टेबल पवन चक्की रोजाना 10 से 20 यूनिट तक बिजली पैदा करने में सक्षम है। इस इनोवेशन को देश ही नहीं, बल्कि 50 से अधिक देशों में सराहना मिल रही है और कई जगह इसका उपयोग भी हो रहा है। डूंगरसिंह ने वर्ष 2006 में बाढ़ के दौरान बिजली संकट को करीब से देखा था। इसी अनुभव ने उन्हें समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया।
सीमित संसाधनों और औपचारिक उच्च शिक्षा के अभाव के बावजूद उन्होंने यूट्यूब, रिसर्च पेपर्स और स्वयं के प्रयोगों के माध्यम से इस तकनीक को विकसित किया। शुरुआत में एल्यूमिनियम शीट और पुराने पंखों के ब्लेड से प्रोटोटाइप बनाया, जिसे बाद में उन्नत रूप दिया। उन्होंने सनविंड इनोवेटिव नाम से कंपनी स्थापित की, जिसे लाइसेंस और पेटेंट प्राप्त हो चुका है। यह भारत की पहली स्पेशलाइज्ड पोर्टेबल विंड टर्बाइन कंपनी मानी जा रही है। उनके उत्पाद घरों, स्कूलों और आर्मी कैंप्स में उपयोग किए जा रहे हैं।
वाइब्रेंट गुजरात समिट 2024 में उन्होंने 50 करोड़ रुपए का एमओयू भी साइन किया है। यह टर्बाइन खासतौर पर कम हवा वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है, जो राजस्थान जैसे इलाकों के लिए उपयोगी है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 50 हजार रुपए है, जिससे आम व्यक्ति भी इसे अपने घर की छत या बालकनी में लगा सकता है। यह टरबाइन पोर्टेबल होने के कारण आसानी से कहीं भी लगाई जा सकती है।
लगभग 50 हजार रुपए की लागत में मिलने वाली यह तकनीक रोज 10–20 यूनिट बिजली उत्पादन कर सकती है। बिजली बिल में कमी आती है। कम कीमत व पोर्टेबल होने से लगाने में आसानी हवा की गति से टरबाइन के ब्लेड घूमते हैं, जिससे जनरेटर सक्रिय होकर बिजली पैदा करता है। यह सिस्टम इन्वर्टर से जुड़कर सीधे घरेलू उपयोग में लिया जा सकता है। कम हवा में भी कार्य करने के लिए विशेष डिजाइन किया गया है, जिससे दूरस्थ और रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी यह प्रभावी साबित होता है। ऐसे काम करती है पोर्टेबल विंड टर्बाइन





