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बाटी-चोखा के दीवानों के लिए जन्नत है सीधी, 30रुपए में याद आएगी बिहार की गलियां

मध्य प्रदेश का सीधी जिला अब सिर्फ खेती-किसानी के लिए ही नहीं जाना जा रहा, बल्कि यहां का देसी खान-पान भी धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना रहा है. खासतौर पर शहर के कन्या महाविद्यालय के पास लगने वाला दादी अम्मा का बाटी-चोखा स्टॉल इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

कौन हैं दादी अम्मा, जिनके स्वाद की हो रही चर्चा

दादी अम्मा का असली नाम सीता द्विवेदी है. पिछले दो वर्षों से वे पूरे समर्पण के साथ बाटी-चोखा बना रही हैं. न कोई बड़ी दुकान, न कोई चमक-दमक बस सादगी, मेहनत और स्वाद. यही वजह है कि आज उनका नाम पूरे सीधी शहर में जाना जाता है.

शुद्ध देसी घी और खुद पिसे मसाले है असली राज

दादी अम्मा बताती हैं कि वे साफ-सफाई और गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करतीं. बाटी-चोखा में इस्तेमाल होने वाला मसाला वे बाजार से नहीं खरीदतीं, बल्कि खुद कूट-पीसकर तैयार करती हैं. बाटी में शुद्ध देसी घी का उपयोग किया जाता है, जिससे उसका स्वाद बिल्कुल अलग और देसी लगता है.

बाटी-चोखा की खास तैयारी का तरीका

दादी अम्मा की बाटी सिर्फ गेहूं के आटे से नहीं बनती. उसमें चना सत्तू, अजवाइन और खड़े मसाले मिलाए जाते हैं, जो स्वाद को और बढ़ा देते हैं. चोखा आलू, बैंगन, टमाटर, धनिया, लहसुन और अदरक से तैयार होता है. साथ में दी जाने वाली चटनी अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और सरसों के तेल से बनाई जाती है, जो हर निवाले को यादगार बना देती है.

महंगाई के दौर में भी सिर्फ 30 रुपये

आज जब हर चीज महंगी होती जा रही है, ऐसे समय में दादी अम्मा सिर्फ 30 रुपये में दो बाटी-चोखा दे रही हैं. उनका कहना है कि अच्छा खाना हर किसी तक पहुंचना चाहिए. यही सोच उन्हें बाकी स्टॉल्स से अलग बनाती है.

सुबह 6 बजे से शुरू होती है मेहनत

दादी अम्मा रोज सुबह 6 बजे से तैयारी शुरू कर देती हैं और सुबह 9 बजे स्टॉल खोलती हैं, जो शाम करीब 8 बजे तक चलता है. हर दिन 300 से 350 ग्राहक यहां आते हैं. कई लोग बाटी-चोखा पैक कराकर घर भी ले जाते हैं.

शादी-पार्टियों तक पहुंचा स्वाद

अब दादी अम्मा का स्वाद सिर्फ स्टॉल तक सीमित नहीं रहा. शादी और पार्टियों के लिए एडवांस बुकिंग भी होने लगी है. मांग आने पर वे मौके पर जाकर मेहमानों को ताजा बाटी-चोखा खिलाती हैं.

मेहनत से बनी पहचान

रोजाना 1500 से 1800 रुपये की कमाई से दादी अम्मा अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं. बिना किसी प्रचार के, सिर्फ स्वाद और मेहनत के दम पर उन्होंने सीधी में एक नई पहचान बना ली है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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