जमुई. समर सीजन की शुरुआत हो गई है और गर्मी का भारी प्रकोप देखने को मिल रहा है. इस गर्मी में जहां एक तरफ खेती-बाड़ी से जुड़े लोग परेशान हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जमुई के एक युवक ने इस गर्मी में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन किया है. दरअसल जमुई जिले के खैरा प्रखंड क्षेत्र के नवडीहा गांव के रहने वाले शिवेंदु कुमार ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं.
पिछले तीन साल से वह इस मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं. शिवेंदु ने भी पहले बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की और इसके बाद नौकरी शुरू कर दी. लेकिन अपनी नौकरी बीच में ही छोड़कर वह घर चले आए और मशरूम उत्पादन करने में लग गए. वे अब आसपास के इलाके में मशरूम की सप्लाई भी कर रहे हैं.
परिवार का मिला सपोर्ट तो लिया फैसला
शिवेंदु ने बताया कि ‘जब मैं अपनी पढ़ाई कर रहा था, तब मुझे मशरूम उत्पादन का तरीका समझ आया. इस दौरान ही मैंने सोच लिया था कि मैं आगे चलकर मशरूम का उत्पादन करूंगा. फिर मैंने नौकरी शुरू कर दी, लेकिन वहां मेरा मन नहीं लगा और करीब एक साल पहले मैं गांव चला आया.
शादी होने के बाद जिम्मेदारी बढ़ गई थी, लेकिन मेरी पत्नी ने मेरा सपोर्ट किया और मेरे काम में मेरा साथ दिया. परिवार के सहयोग से मैंने मशरूम का उत्पादन शुरू किया और अब पूरी तरह से इसी पर निर्भर हूं. इसके लिए मैंने ग्रीन हाउस बनाकर इसका उत्पादन शुरू किया. शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन अब आसानी होती है.’
अभी कर रहे हैं सात सौ से भी अधिक बैग में उत्पादन
शिवेंदु ने बताया कि ‘मैंने शुरुआत एक सौ बैग से की थी. अभी मैं सात सौ बैग में इसका उत्पादन कर रहा हूं. हर बैग से पंद्रह किलो तक का उत्पादन होता है. एक बैग को तैयार होने में करीब पंद्रह से बीस दिन का समय लगता है. बाजार में ऑयस्टर मशरूम बड़ी मुश्किल से मिलता है, क्योंकि इसमें मेहनत अधिक है. इसलिए बाजार में इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है.
एक किलो ऑयस्टर मशरूम की कीमत दो से ढाई सौ रुपये प्रति किलो तक होती है. उन्हें अपना उत्पाद बेचने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता है, उनके घर से ही इसकी बिक्री हो जाती है. उनके पिता प्रदीप सिंह पेशे से किसान हैं और वह भी बेटे के काम में हाथ बंटाते हैं.
शादी होने के बाद जिम्मेदारी बढ़ गई थी, लेकिन मेरी पत्नी ने मेरा सपोर्ट किया और मेरे काम में मेरा साथ दिया. परिवार के सहयोग से मैंने मशरूम का उत्पादन शुरू किया और अब पूरी तरह से इसी पर निर्भर हूं. इसके लिए मैंने ग्रीन हाउस बनाकर इसका उत्पादन शुरू किया. शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन अब आसानी होती है.’
अभी कर रहे हैं सात सौ से भी अधिक बैग में उत्पादन
शिवेंदु ने बताया कि ‘मैंने शुरुआत एक सौ बैग से की थी. अभी मैं सात सौ बैग में इसका उत्पादन कर रहा हूं. हर बैग से पंद्रह किलो तक का उत्पादन होता है. एक बैग को तैयार होने में करीब पंद्रह से बीस दिन का समय लगता है. बाजार में ऑयस्टर मशरूम बड़ी मुश्किल से मिलता है, क्योंकि इसमें मेहनत अधिक है. इसलिए बाजार में इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है.
एक किलो ऑयस्टर मशरूम की कीमत दो से ढाई सौ रुपये प्रति किलो तक होती है. उन्हें अपना उत्पाद बेचने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता है, उनके घर से ही इसकी बिक्री हो जाती है. उनके पिता प्रदीप सिंह पेशे से किसान हैं और वह भी बेटे के काम में हाथ बंटाते हैं.
भीषण गर्मी में भी कर रहे हैं उत्पादन
अभी गर्मी का मौसम चल रहा है और तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है. इस गर्मी में मशरूम का उत्पादन काफी मुश्किल होता है. ऑयस्टर मशरूम के उत्पादन के लिए पंद्रह डिग्री सेल्सियस का न्यूनतम तापमान जरूरी होता है. इससे बचने के लिए मैंने ग्रीन हाउस बनाया है, जिसमें डबल लेयर ग्रीन हाउस का निर्माण किया है.
इसके अलावा ग्रीन हाउस में चारों तरफ जूट का बोरा लगाया है तथा उसे पूरे दिन में चार से पांच बार पानी से भिगोता हूं, ताकि तापमान सामान्य बना रहे. उन्होंने बताया कि आगे इसे और भी बड़े स्तर पर उत्पादन करने का प्लान है.’





