देश दुनिया

स्कूल बस परमिट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: केवल अभिभावकों से समझौता नहीं, स्कूल से अनुबंध जरूरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल बसों के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों के परिवहन के लिए निजी बस संचालकों को स्कूल से औपचारिक समझौता करना अनिवार्य है। केवल अभिभावकों के साथ किया गया समझौता परमिट पाने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाएगा।

जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।

अदालत ने कहा,

“बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसे ध्यान में रखते हुए बनाए गए नियमों का पालन अनिवार्य है।”

अदालत ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियम 1998 के नियम 222-बी का हवाला देते हुए कहा कि स्कूल बस चलाने के लिए निजी बस मालिक और स्कूल प्रबंधन के बीच समझौता होना जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल की होती है, न कि अलग-अलग अभिभावकों की।

मामले में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उसने एक कंपनी के साथ समझौता किया, जिसके कर्मचारियों के बच्चों को एक स्कूल तक लाने-ले जाने का काम वह करता है। उसने यह भी कहा कि कुछ वाहन संचालकों को अभिभावकों से समझौते के आधार पर परमिट दिया गया, इसलिए उसे भी राहत मिलनी चाहिए।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज किया और कहा कि नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो केवल अभिभावकों के साथ समझौते को मान्यता देती हो।

अदालत ने कहा,

“नियमों में स्पष्ट है कि स्कूल ही बच्चों की सामूहिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। इसलिए यह जिम्मेदारी व्यक्तिगत अभिभावकों या उनके नियोक्ताओं पर नहीं डाली जा सकती।”

अदालत ने यह भी कहा कि नियमों में तय शर्तें अनिवार्य हैं और इन्हें किसी भी परिस्थिति में बदला या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की और स्पष्ट किया कि स्कूल बस परमिट के लिए नियमों का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button