सिलीगुड़ी कॉरिडोर, एक पतली सी जमीन की पट्टी, जो पूरे नॉर्थईस्ट को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ती है, इसी इलाके में रंगापानी से बागडोगरा के बीच अब अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनाने की योजना है. करीब 35 किलोमीटर लंबा ये प्रोजेक्ट पूरी तरह जमीन के नीचे होगा. जिससे किसी भी खतरे या आपात स्थिति में ट्रेनें बिना किसी रुकावट के चलती रहें.इस प्रोजेक्ट की खासियत इसका ड्यूल यूज होना है. यानी रेल के साथ-साथ सड़क सुरंग भी बनाई जाएगी. इससे सेना की आवाजाही, हथियार और जरूरी सामान की सप्लाई और आपदा के समय राहत पहुंचाना सब कुछ तेज और सुरक्षित हो जाएगा. सहसे जरूरी बात ये है कि ये पूरा नेटवर्क जमीन के नीचे होगा जिससे दुश्मनों के लिए इसे निशाना बनाना नामुमकिन सा हो जाएगा.
टिन माइल हाट से रंगापानी तक का ये रेलवे ट्रैक छोटे छोटे स्टेशनों से होकर गुजरता है. गुलमा जो जंगल और पहाड़ियों के पास है. सिवोक जो तीस्ता नदी के किनारे एक अहम जंक्शन है. बागडोगरा जहां एयरपोर्ट और सेना की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बनाती है और चैटर हाट जैसे छोटे हॉल्ट करीब 1 घंटे का ये पूरा रूट नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी की रीढ़ बना हुआ है.
चिकननेक कहे जाने वाला है यह ट्रैक
देश के सबसे संवेदनशील इलाके सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जुड़ी है. चिकननेक कहे जाने वाले इस हिस्से में अब जमीन के नीचे रेलवे कॉरिडोर बनाने की है. जिससे नॉर्थ-ईस्ट तक पहुंच हर हाल में हर समय बनी रहेगी. अगर ऊपर से रास्ता बाधित हो तो नीचे से कनेक्टिविटी कभी नहीं रुके. यही वजह है कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ रेल लाइन नहीं बल्कि देश की सुरक्षा का मजबूत बैकअप माना जा रहा है.
16000 करोड़ रुपए की है लागत
करीब 11,600 करोड़ रुपए की लागत वाला ये प्रोजेक्ट 4 साल में पूरा करने का लक्ष्य है. इसमें कई लंबी सुरंगें बनाई जाएंगी, जिनमें सबसे लंबी टनल करीब 19 किलोमीटर की होगी. हालांकि आर्थिक नजरिए से इसका सीधा फायदा ज्यादा नहीं दिखता लेकिन रणनीतिक तौर पर ये देश के लिए बेहद अहम प्रोजेक्ट है.
22 किमी. का ट्रैक बॉर्डर होगा मजबूत
इस मामले में ब्रिगेडियर रिटायर्ड शरदेंदु बताते हैं कि हमेशा ये कॉरिडोर संवेदनशील बना रहता है. 22 किलोमीटर के इस कॉरिडोर में एक तरफ नेपाल दूसरे तरफ भूटान, चाइना और बांग्लादेश है. जब अंडरग्राउंड रेल कॉरिडोर बनना है तो भारत की सुरक्षा और पुख्ता होगी. नॉर्थईस्ट की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट हो सकता है.यानी ये टनल बेहद ही रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है.राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई भी कीमत बड़ी नहीं है. आज के समय में डिस्टेंस वाली लड़ाइयां लड़ी जाती है और अगर चीन इस सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर अटैक करता है तो डिस्टर्बेंस हो सकता है, यही वजह है कि अंडरग्राउंड होने की वजह से यह सुरक्षित रहेगा. इसके बन जाने से सुरक्षित रसद पहुंचाई जा सकती है.





