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पानी की टंकी से फूटा 15 फुट ऊंचा फव्वारा, लाखों लीटर पानी हुआ बर्बाद, बूंद-बूंद को तरसे लोग

अलवर जिले के गोविंदगढ़ कस्बे में जलदाय विभाग की लापरवाही के कारण पानी की टंकी (Water Tank) से अचानक 15 फीट ऊंचा पानी का फव्वारा फूट पड़ा. इससे लाखों लीटर पीने का पानी व्यर्थ बह गया. क्षेत्र में पेयजल संकट के बीच हुई इस बर्बादी से स्थानीय लोगों में आक्रोश है और उन्होंने जांच की मांग की है.राजस्थान के अलवर जिले से सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. अलवर के गोविंदगढ़ कस्बे में जलदाय विभाग (PHED) के कर्मचारियों और अभियंताओं  की अनदेखी के कारण एक पानी की टंकी में बड़ा रिसाव हो गया. पानी का दबाव इतना तेज था कि टंकी के बीच से करीब 15 फीट ऊंचा पानी का फव्वारा फूट पड़ा.

देखते ही देखते लाखों लीटर पीने का साफ पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो गया, जबकि कस्बे के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

यह पूरी घटना गोविंदगढ़ कस्बे के नगर पंप हाउस के पास स्थित वाटर बॉक्स (OHSR) की पानी की टंकी की है. शुक्रवार को अचानक टंकी के मुख्य हिस्से में एक बड़ा रिसाव हो गया. तेज प्रेशर के कारण पानी 15 फुट ऊंचे फव्वारे की तरह हवा में उछलने लगा. पानी का बहाव इतना विकराल था कि कुछ ही देर में पंप हाउस के आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया. इस अद्भुत लेकिन दर्दनाक बर्बादी को देखने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए.प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने जलदाय विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. लोगों का कहना है कि टंकी से काफी देर तक लगातार पानी बहता रहा और इसकी सूचना भी विभाग को दी गई, लेकिन समय रहते रिसाव को रोकने के लिए कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई.

यह लापरवाही तब सामने आई है जब गोविंदगढ़ क्षेत्र के कई इलाके पहले से ही भीषण पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं. लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ लाखों लीटर पानी अधिकारियों की नाक के नीचे बह गया. ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग टंकी का समय-समय पर मेंटेनेंस और निरीक्षण करता, तो इतना बड़ा नुकसान कभी नहीं होता.

स्थानीय निवासियों में जलदाय विभाग के अभियंताओं के खिलाफ भारी आक्रोश है. लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारी और इंजीनियर नियमित मॉनिटरिंग नहीं करते हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता को भुगतना पड़ता है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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