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प्लेटफॉर्म शेल्टर्स की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न, रेलवे बोर्ड करेगा व्यापक जांच

प्लेटफॉर्म शेल्टर्स की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न, रेलवे बोर्ड करेगा व्यापक जांच

लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में प्लेटफार्म शेड गिरने की घटना के बाद रेलवे स्टेशनों पर बने प्लेटफॉर्म शेल्टर्स की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। विभिन्न मंडलों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार कई स्थानों पर भारी स्ट्रक्चरल स्टील के स्थान पर पाइप आधारित शेड लगाए गए हैं तथा कुछ मामलों में निर्धारित मानकों से कम मोटाई (अंडर-गेज) के पाइप के उपयोग किए जाने की आशंका जताई गई है।

सूत्रों के अनुसार प्लेटफॉर्म शेल्टर के निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों के दौरान लागत कम करने के उद्देश्य से मूल डिजाइन और सामग्री में बदलाव किए गए। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जहां भारी “स्ट्रक्चरल स्टील” का उपयोग आवश्यक था, वहां अपेक्षाकृत कमजोर संरचनाओं का प्रयोग किए जाने से प्लेटफार्म शेल्टर्स की भार वहन क्षमता प्रभावित हो सकती है। यदि पाइपों की मोटाई भी निर्धारित मानकों से कम पाई जाती है, तो इससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

चारबाग की घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म शेल्टर्स की जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, पाइपों की वास्तविक मोटाई, डिजाइन अनुमोदन प्रक्रिया तथा कार्यदायी एजेंसियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सामग्री के नमूनों का तकनीकी परीक्षण भी कराया जाएगा।

प्लेटफॉर्म शेल्टर्स की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न, रेलवे बोर्ड करेगा व्यापक जांच

लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में प्लेटफार्म शेड गिरने की घटना के बाद रेलवे स्टेशनों पर बने प्लेटफॉर्म शेल्टर्स की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। विभिन्न मंडलों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार कई स्थानों पर भारी स्ट्रक्चरल स्टील के स्थान पर पाइप आधारित शेड लगाए गए हैं तथा कुछ मामलों में निर्धारित मानकों से कम मोटाई (अंडर-गेज) के पाइप के उपयोग किए जाने की आशंका जताई गई है।

सूत्रों के अनुसार प्लेटफॉर्म शेल्टर के निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों के दौरान लागत कम करने के उद्देश्य से मूल डिजाइन और सामग्री में बदलाव किए गए। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जहां भारी “स्ट्रक्चरल स्टील” का उपयोग आवश्यक था, वहां अपेक्षाकृत कमजोर संरचनाओं का प्रयोग किए जाने से प्लेटफार्म शेल्टर्स की भार वहन क्षमता प्रभावित हो सकती है। यदि पाइपों की मोटाई भी निर्धारित मानकों से कम पाई जाती है, तो इससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

चारबाग की घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म शेल्टर्स की जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, पाइपों की वास्तविक मोटाई, डिजाइन अनुमोदन प्रक्रिया तथा कार्यदायी एजेंसियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सामग्री के नमूनों का तकनीकी परीक्षण भी कराया जाएगा।

 

रेल अधिकारियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि किसी परियोजना में अंडर-गेज सामग्री का उपयोग पाया जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाएगी। जांच के दायरे में निरीक्षण करने वाले अधिकारी, ठेकेदार, सप्लायर तथा संबंधित निर्माण एजेंसियां भी आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

रेलवे, देश की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है, जिसका उपयोग प्रतिदिन करोड़ों यात्री करते हैं। ऐसे में प्लेटफॉर्म शेल्टर्स, गुड्स शेड, आरयूबी (#RUB) शेड, एलएचएस (#LHS) शेड तथा अन्य रेल संरचनाओं के निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

चारबाग की घटना ने रेल प्रशासन को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा करने का अवसर दिया है। अब सभी की निगाहें रेलवे बोर्ड की प्रस्तावित जांच पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, दोषियों की जवाबदेही तय होगी और भविष्य में यात्रियों की संरक्षा-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

 

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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