*जिले में मलेरिया नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान जारी, स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट*
*झलमला, रेंगाखार और आसपास के गांवों में विशेष सर्वे दल सक्रिय*
*घर-घर सर्वे, रैपिड टेस्ट और निःशुल्क उपचार से संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण*
कवर्धा जुलाई 2026। जिले के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करते हुए विशेष स्वास्थ्य दलों की तैनाती की गई है। प्रभावित गांवों में घर-घर सर्वे, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट एवं रक्तपट्टी के माध्यम से मलेरिया की जांच तथा संक्रमित मरीजों का निःशुल्क एवं समुचित उपचार निरंतर किया जा रहा है। आवश्यकता अनुसार मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर भी किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी जून माह से मलेरिया सर्वे अभियान संचालित किया जा रहा है। अब तक जिले में 40 हजार से अधिक लोगों की घर-घर जाकर मलेरिया जांच की जा चुकी है। सर्वे के दौरान सामान्य सर्दी, खांसी एवं बुखार से पीड़ित व्यक्तियों का भी समूल उपचार किया गया है। लगभग 10–12 ग्रामों में मलेरिया के छुटपुट प्रकरण पाए गए, जिनका समय पर पूर्ण उपचार कर संक्रमण को नियंत्रित किया गया है।
विगत एक सप्ताह में झलमला एवं रेंगाखार सेक्टर में 20 हजार से अधिक लोगों की मलेरिया जांच की गई है। सेक्टर सुपरवाइजर के निर्देशन में 15–20 सर्वे दलों द्वारा झलमला, रेंगाखार एवं आसपास के क्षेत्रों में निरंतर सर्वे कार्य किया जा रहा है। इन दलों में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं मितानिन शामिल हैं। सीएचसी झलमला, पीएचसी रेंगाखार एवं पीएचसी चिल्फी सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट पर रखा गया है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र रायपुर की विशेषज्ञ टीम द्वारा जिले के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर झलमला के आसपास, पैरासाइटोलॉजी एवं एंटोमोलॉजी संबंधी विशेष अध्ययन एवं तकनीकी कार्य किया जा रहा है, जिससे रोग नियंत्रण गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरदानियों के उपयोग को बढ़ावा देने, स्रोत नियंत्रण, लार्वा नाशक गतिविधियां, कुओं एवं नलकूपों का क्लोरीनेशन, तथा कीटनाशक छिड़काव जैसी आवश्यक कार्यवाहियां की जा रही हैं। साथ ही राज्य कार्यालय को कीटनाशक मच्छरदानी एवं छिड़काव हेतु कार्ययोजना भेजी जा चुकी है। ग्रामीणों द्वारा भी स्वयं जागरूकता दिखाते हुए नीम पत्तों का धुआं आदि पारंपरिक उपाय अपनाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं मितानिन के माध्यम से लोगों को बुखार होने पर तत्काल जांच कराने तथा चिकित्सक द्वारा निर्धारित पूरा उपचार लेने की सलाह दी जा रही है। साथ ही व्यापक जनजागरूकता अभियान भी निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ डी के तूरे ने आमजन से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को बुखार आने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत मलेरिया की जांच कराएं। समय पर जांच एवं पूर्ण उपचार से मलेरिया को गंभीर होने से रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में जिले की स्थिति पूर्णतः नियंत्रण में है तथा मलेरिया से किसी भी मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है। विभाग द्वारा स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है एवं सभी आवश्यक नियंत्रण एवं रोकथाम उपाय प्रभावी रूप से संचालित किए जा रहे हैं।




