चित्रकूटः कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में उड़ान और हौसलों में जान होती है. चित्रकूट के एक छोटे से गांव की बेटी ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है, सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाली इस होनहार छात्रा ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर देश के प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) की प्रवेश प्रक्रिया में सफलता हासिल की है. इस उपलब्धि के बाद न केवल उसके गांव, बल्कि पूरे चित्रकूट जिले में खुशी और गर्व का माहौल है.
पिता हैं बैंक मित्र
आप को बता दे कि चित्रकूट जिले के विकासखंड रामनगर के ग्राम रामनगर की रहने वाली प्रज्ञा पाण्डेय का प्रथम चरण की काउंसलिंग में IISER बरहमपुर (ओडिशा) के लिए चयन हुआ है. यह सफलता जिले के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है. चयन की खबर मिलते ही गांव में बधाई देने वालों का तांता लग गया है. ग्रामीण, शिक्षक, रिश्तेदार और छात्र-छात्राएं प्रज्ञा के घर पहुंचकर उन्हें और उनके परिवार को शुभकामनाएं दे रहे हैं. जानकारी के लिए बता दे कि प्रज्ञा पाण्डेय रामनगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के बैंक मित्र आशुतोष पाण्डेय की सबसे छोटी पुत्री हैं और वह बहुत साधारण परिवार की है. इस परीक्षा को निकालने के बाद प्रज्ञा ने यह साबित कर दिया कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए महंगे संसाधनों की नहीं बल्कि मजबूत इरादों और निरंतर मेहनत की जरूरत होती है.उन्होंने कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई कर्पूरी ठाकुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामनगर से की है. इसके बाद कक्षा 9 से 12 तक महात्मा ज्योतिबा राव फुले इंटर कॉलेज रामनगर से इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की है. इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने एक साल स्कूल से पढ़ाई करना छोड़ दिया.और वह नियमित रूप से लाइब्रेरी में प्रतिदिन लगभग 10 घंटे तक स्व-अध्ययन करती रहती है. इसी अनुशासित तैयारी का परिणाम आज उन्हें IISER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में चयन के रूप में मिला है.उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि अपनी सफलता का श्रेय मैं अपने शिक्षकों, बाबा और पिता को देना चाहती हूं. क्योंकि उन लोगों ने बचपन से पढ़ाई के लिए लगातार प्रेरित किया और हर कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया है. यही सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बनी है. प्रज्ञा ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है. यदि विद्यार्थी नियमित पढ़ाई करें, लक्ष्य तय करके मेहनत करें और कभी हार न मानें, तो वे भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैंउन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि अपनी सफलता का श्रेय मैं अपने शिक्षकों, बाबा और पिता को देना चाहती हूं. क्योंकि उन लोगों ने बचपन से पढ़ाई के लिए लगातार प्रेरित किया और हर कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया है. यही सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बनी है. प्रज्ञा ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है. यदि विद्यार्थी नियमित पढ़ाई करें, लक्ष्य तय करके मेहनत करें और कभी हार न मानें, तो वे भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं.





