गर्मियों की छुट्टियां हों और घर की छतों या बालकोनी में अचार के मर्तबान न दिखे, ऐसा तो हो ही नहीं सकता! लेकिन सोचिए, आपने तपती धूप में घंटों मेहनत की और कुछ ही दिनों में आपका पसंदीदा अचार काला पड़ गया या गल गया, तो कितना बुरा लगेगा? अक्सर हम रेसिपी तो परफेक्ट फॉलो करते हैं, पर गड़बड़ी कच्ची कैरी के चुनाव में हो जाती है. अगर आप भी इस बार सालों-साल टिकने वाला चटपटा अचार बनाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. आइए, आमों के गढ़ मलीहाबाद के एक अनुभवी किसान से सीधे जानते हैं परफेक्ट कच्ची कैरी पहचानने के वो 4 परफेक्ट तरीके, जो आपके अचार का स्वाद दोगुना कर देंगे.अचार के लिए परफेक्ट आम चुनने के तरीके(How To Choose Raw Mango For Pickle)- छुकर देखें, आम ‘पत्थर’ जैसा सख्त होना चाहिए
अपने ब्लॉग में किसान रमेश जी ने बताया कि जब भी आप अचार के लिए कच्ची कैरी खरीदने जाएं, तो उसे हाथ में लेकर थोड़ा दबाकर देखें. आम बिल्कुल कड़ा होना चाहिए, जैसे कोई पत्थर हो. अगर आम थोड़ा सा भी थलथला या दबा हुआ लग रहा है, तो उसे बिल्कुल न लें. ऐसा आम अंदर से पकना शुरू हो चुका होता है, जिसका अचार बहुत जल्दी गल जाता है और उसमें वो पारंपरिक क्रंच (कुरकुरापन) नहीं आ पाता.डंठल का हिस्सा चेक करें: ‘चेपी’ है जरूरी
क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ आमों के डंठल से चिपचिपा सफेद लिक्विड निकलता है? इसे आम भाषा में ‘चेपी’ या गोंद कहा जाता है. किसान बताते हैं कि जिस कच्ची कैरी का डंठल ताजा हो और उसमें से चेपी निकल रही हो, वह पेड़ से हाल ही में तोड़ा गया फ्रेश आम होता है. अगर डंठल पूरी तरह सूखा या काला पड़ चुका है, तो वह आम कई दिन पुराना है. पुराना आम अंदर से नमी खो देता है और इसका अचार लंबे समय तक टिक नहीं पाता.रंग और त्वचा पर दें ध्यान
बाजार में मिलने वाली हर कच्ची कैरी अचार के लिए सही नहीं होती. अचार के लिए हमेशा गहरे हरे रंग की कैरी चुननी चाहिए. अगर आम की त्वचा पर हल्का पीलापन दिखने लगा है, तो इसका मतलब है कि वह ‘पाल’ का है या पकने की कगार पर है. इसके अलावा, आम पर काले धब्बे या कट्स नहीं होने चाहिए. थोड़े से भी दाग वाले आम से पूरा मर्तबान खराब हो सकता है.
.सही वैरायटी का चुनाव है सबसे बड़ा सीक्रेट
हर आम का अपना एक मिजाज होता है. किसान की मानें तो उत्तर और मध्य भारत में अचार के लिए ‘रामकेला’ आम को सबसे बेस्ट माना जाता है. इस आम में खट्टापन बहुत अच्छा होता है और इसका गूदा (पल्प) सख्त होता है. इसके अलावा ‘कलमी’ और ‘लंगड़ा’ के कच्चे स्वरूप का इस्तेमाल भी अचार के लिए खूब किया जाता है. इनमें जाली (गुठली का कड़ा हिस्सा) बहुत अच्छी पड़ती है, जो मसाले को बांधकर रखती है.
घर लाते ही करें ये जरूरी काम
चलते-चलते किसान भाई ने एक और कमाल की टिप दी. बाजार से कच्ची कैरी लाने के बाद उसे तुरंत न काटें. सबसे पहले आमों को कम से कम 2 से 3 घंटे के लिए ठंडे पानी में डुबोकर रख दें. ऐसा करने से आम की गर्मी (चेपी का असर) निकल जाती है. इसके बाद आम को पोंछकर पूरी तरह सुखा लें, और फिर उसकी कटाई करें. याद रखें, अचार का सबसे बड़ा दुश्मन पानी है, इसलिए काटने के बाद आम में नमी बिल्कुल नहीं रहनी चाहिए.
तो बस, अगली बार जब बाजार जाएं, तो इन आसान टिप्स को जरूर याद रखें. सही कैरी लाएं, चटपटा अचार बनाएं और सालों-साल इसके स्वाद का आनंद लें!





