- सुप्रीम कोर्ट में रोजाना कई मामलों की सुनवाई होती है। शुक्रवार को ऐसे केस पर सुनवाई हुई, जो लंबे समय से हाई कोर्ट में पेंडिंग है। इस मामले में सीजेआई सूर्यकांत एक महिला की पेंडिंग क्लेम से जुड़ी रिट याचिका सुन रहे थे। इस पर वकील ने कहा कि वह एक गरीब महिला है मिलॉर्ड, जिसपर सीजेआई सूर्यकांत ने ऐसा जवाब दिया, जिसकी चर्चा हो रही है।
- जब वकील ने महिला को गरीब बताया तो सीजेआई सूर्यकांत ने दो टूक जवाब दिया और कहा, ”वह सुप्रीम कोर्ट आने से पहले गरीब थी या सुप्रीम कोर्ट आने के बाद गरीब हुई है?” सीजेआई ने वकील को आगे समझाते हुए कहा कि प्लीज आप यह मत बोलिए कि वह एक गरीब महिला है। आपको यह कहना चाहिए कि वह एक फाइटर महिला है, जो तब तक घर नहीं बैठेगी जब तक पूरा क्लेम लॉजिकल नतीजे तक नहीं पहुंच जाता है। जब वह सुप्रीम कोर्ट के सामने है तो उसे आप गरीब महिला क्यों बता रहे हैं?
- बता दें कि यह मामला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से जुड़ा था, जहां पर महिला का केस 11 साल से पेंडिंग है और सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की जा रही कि हाई कोर्ट को निर्देश दे कि वह मामले की सुनवाई जल्द से जल्द करे और फैसला दें।
- वहीं, एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतें किसी महिला, खासकर नाबालिग को, गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि लड़की पड़ोस के एक लड़के के साथ संबंध में थी और इसी दौरान वह गर्भवती हो गई थी और उसने चिकित्सकीय रूप से अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देने का अदालत से आग्रह किया है। पीठ ने मुंबई के जेजे अस्पताल को नाबालिग की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने का निर्देश दिया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।
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