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आदिवासी गांव में पादरियों व धर्मांतरितों के प्रवेश पर रोक वाले होर्डिंग्स के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें ग्राम सभा द्वारा गांव के प्रवेश द्वारों पर लगाए गए ऐसे होर्डिंग/सूचना बोर्ड को सही ठहराया गया था, जिनमें ईसाई पादरियों और धर्मांतरण कर चुके ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस (याचिकाकर्ता की ओर से) और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।

ग्राम सभा का तर्क

बताया गया कि ग्राम सभा ने यह कदम गांववासियों के जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन को रोकने के उद्देश्य से उठाया था।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के पैरा 34 का उल्लेख किया, जिसमें याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी (ग्राम सभा) के समक्ष उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी गई थी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट में याचिका सीमित मुद्दों पर दायर की गई थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में कई नए तथ्य और आयाम जोड़े गए हैं। इसलिए याचिकाकर्ता पुनः हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।

याचिकाकर्ता का पक्ष

सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि हाईकोर्ट ने गांव में ईसाई पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक को असंवैधानिक नहीं माना, जबकि मिशनरी गतिविधियों पर बिना पर्याप्त सामग्री के टिप्पणी की गई।

उन्होंने अदालत को बताया कि—

देश में प्रार्थना सभाओं के दौरान पादरियों पर कथित हमलों से जुड़े मामले लंबित हैं

धर्मांतरित आदिवासियों को गांव में दफनाने की अनुमति नहीं दी गई

कुछ मामलों में कब्र से शव निकालकर अन्य स्थान पर दफनाने की नौबत आई

उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले दस वर्षों में छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से जुड़े मामलों में एक भी दोषसिद्धि नहीं हुई है।

अदालत का निर्णय

पीठ इन तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई और याचिका खारिज कर दी।

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा:

“आपको नियमों के तहत उचित प्राधिकारी के पास जाना चाहिए था। वे हलफनामों, सामग्री और साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच करते।”

इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले उपलब्ध वैधानिक उपायों का उपयोग किया जाना चाहिए और सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने से पहले संबंधित प्राधिकरण से संपर्क करना आवश्यक है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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