बरेली: कड़ी मेहनत, मजबूत इरादों और परिवार के त्याग के दम पर हर मुश्किल को हराया जा सकता है. इसका प्रेरणादायक उदाहरण बने हैं यश गॉड, जिन्होंने NEET परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1017 हासिल कर अपने परिवार और शहर का नाम रोशन किया है. यश अब भविष्य में न्यूरोसर्जन बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं. यश ने लोकल 18 से बताया कि नौवीं कक्षा तक उनकी रुचि गणित में थी, लेकिन उनके पिता का सपना था.परिवार का पहला डॉक्टर उनका बेटा बने. यही सपना उनकी प्रेरणा बन गया. उनके पिता छोटा हाथी (लोडिंग वाहन) चलाते हैं. दोनों पैरों में रॉड होने के बावजूद वे रोज सुबह सात बजे से रात तक कड़ी मेहनत करते हैं. सामान लोड-अनलोड करते हैं और परिवार का पालन-पोषण करते हैं. यश भावुक होकर कहते हैं कि पिता ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर हर संभव सहयोग दिया और उन्होंने खुद कभी अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं बनने की कोशिश की.यश ने बताया कि दसवीं में अच्छे अंक आने पर मिली छात्रवृत्ति से उन्होंने एक कोचिंग से 5,000 वाला बैच खरीदा. बाद में NSAT स्कॉलरशिप टेस्ट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिली. इसके बाद संस्थान ने उनकी पढ़ाई से लेकर अन्य आवश्यक खर्चों तक में पूरा सहयोग किया. यश का कहना है कि सीमित संसाधनों वाले विद्यार्थियों के लिए सही मार्गदर्शन और मेहनत सबसे बड़ी पूंजी है. यदि छात्र में जुनून हो तो आर्थिक कठिनाइयाँ सफलता की राह नहीं रोक सकतीं. उन्होंने इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय भगवान, अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया. यश के अनुसार फिजिक्स में 164, केमिस्ट्री में 143 और बायोलॉजी में 351 अंक प्राप्त कर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की. उनका संदेश है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और लगातार मेहनत की जाए तो सफलता निश्चित मिलती है.
खुशी का है माहौल
संस्थान के शिक्षकों ने भी यश की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि पूरी टीम बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि हर स्तर पर मार्गदर्शन देती है. जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को देर रात तक संस्थान में रुककर पढ़ने और अपने सभी डाउट्स दूर करने की सुविधा भी दी जाती है. उनका कहना है.कि परिणाम से पहले मेहनत सबसे महत्वपूर्ण होती है और यश जैसे विद्यार्थियों ने इसे साबित किया है.





