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₹20 हजार से 5 लाख तक का सफर… सुनीता बाई बनीं गांव की मिसाल, 10 महिलाओं को मिला रोजगार

गांव में महिलाओं के पास कुछ काम नहीं हुआ करता है महिलाएं बेरोजगार रहती है और घर पर ही काम कर कर ग्रहणी बन जाती है. लेकिन जब अपने परिवार पर इस तरह की परेशानियों का बोझ पढ़ने लगा तो सुनीता बाई ने अपने घर से बाहर निकल कर हल्दी बनाना शुरू कर दिया ₹20000 लगाकर इस हल्दी का काम शुरू किया था आज 5 सालों से हल्दी पापड़ का बिजनेस कर हर साल 5 से 6 लाख रुपए की कमाई कर रही है. और 10 महिलाओं को रोजगार भी दे रही है. सुनीता का कहना है कि पहले मैं अकेली महिला ने काम शुरू किया था जब मुझे लगा कि इससे अच्छी कमाई है तो मैने गांव की अन्य महिलाओं को भी जोड़ा आज मैं 10 महिलाओं को रोजगार दे रही हूं हम समूह बनाकर काम करते हैं हमारे समूह के द्वारा काम किया जाता है हमारे यहां के हल्दी देश-विदेश तक जाती है हम किसानों से हल्दी खरीद कर उसकी पूरी प्रोसेसिंग कर यह हल्दी बेचते हैं. राधे कृष्ण समूह का यह महिलाएं संचालन करती है.

सुनीता बाई ने जानकारी देते हुए बताया कि मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं. लेकिन जब मुझे परिवार का पालन पोषण करने में दिक्कत जा रही थी तो में अपने घर से बाहर निकली मेरे पति और मेरे परिवार के लोगों ने मुझे सहयोग किया. मैंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से हल्दी अपने घर पर बनाकर उसको बेचने का काम किया जिससे मुझे रोजगार मिलने लगा. मुझे से प्रेरित होकर गांव की और भी महिलाएं जुड़ी और हमने एक समूह बना लिया अब समूह के माध्यम से हम हल्दी और पापड़ का बिजनेस करते हैं. ₹20000 लगाकर हमने यह 5 साल पहले शुरुआत की थी आज हमारी लाखों रुपए की कमाई हो रही है. हर महिला को रोजगार मिल गया है. हमको जैसे ही ऑर्डर मिलता है हम वैसे ही काम करना शुरू कर देते हैं. इससे हमारे समय की भी बचत होती है और समय पर पैसे भी मिल जाते हैं.

देश विदेश तक जाती है महिलाओं की हल्दी 
सुनीता बाई का कहना है कि हम सबसे पहले किसानों से गीली हल्दी खरीदते हैं. उसको सुखाते हैं और उसको उबाल कर के उसको पीस लेते हैं, जिससे यह ओरिजिनल हल्दी तैयार हो जाती है. हमारे यहां की हल्दी देश-विदेश तक जाती है हम जहां पर भी एक्जीविशन लगते हैं वहां पर हल्दी रखते हैं जो लोगों को पसंद आती है जिससे हमको रोजगार मिलना शुरू हो गया है. हम 300 से रुपए किलो हल्दी बेचते हैं जिस से हर साल तीन से चार लाख रुपए की कमाई हो रही है. आगे भी हम कई प्रकार के नए प्रोजेक्ट शुरू करेंगे हमारा लक्ष्य गांव की और भी महिलाओं को रोजगार देना है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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