मोहम्मद मुनीब भट्ट ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 131वीं रैंक हासिल करके अपने 7 साल के लंबे संघर्ष को सफलता में बदल दिया है। उनका यह सफर दिखाता है कि अगर लक्ष्य के प्रति जुनून हो, तो कितनी भी असफलताएं आएं, हार नहीं माननी चाहिए।दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के छोटे से गांव मीर-डांतर से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। मोहम्मद मुनीब भट्ट ने सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 131वीं अखिल भारतीय रैंक (AIR 131) हासिल करके अपने 7 साल के लंबे संघर्ष को सफलता में बदल दिया है। 32 वर्षीय मुनीब भट्ट अब इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अधिकारी बनने जा रहे हैं। उनका यह सफर दिखाता है कि अगर लक्ष्य के प्रति जुनून हो, तो कितनी भी असफलताएं आएं, हार नहीं माननी चाहिए।
सिविल इंजीनियर से IPS तक का सफर
सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री पूरी करने के बाद मुनीब भट्ट ने साल 2017 में UPSC की तैयारी शुरू की थी। यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने लगातार कई प्रयासों में असफलता का सामना किया। पहले प्रयास में वह प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाए। अगले प्रयास में प्रीलिम्स तो पास किया, लेकिन मुख्य परीक्षा में रह गए। एक बार तो वह इंटरव्यू कॉल से बस कुछ ही अंकों से चूक गए थे।
लगातार असफलता मिलने के बावजूद मुनीब ने कभी हिम्मत नहीं हारी। अपनी आर्थिक और मानसिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्होंने साल 2023 में जम्मू और कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) की परीक्षा दी और उसमें सफल रहे। वह पहले से ही जम्मू-कश्मीर पुलिस सेवा (KPS) में एक अधिकारी (प्रोबेशनर) के तौर पर सेवा दे रहे थे, लेकिन उनका सपना UPSC में जाने का था।
छठी बार में मिली शानदार सफलता
मुनीब भट्ट ने नौकरी के साथ-साथ UPSC की तैयारी जारी रखी। 2024 की परीक्षा, जो उनका छठा और आखिरी प्रयास था, उन्होंने पूरी लगन और नए उत्साह के साथ दी। आखिरकार उनकी दृढ़ मेहनत रंग लाई और उन्हें AIR 131 मिली। यह उन सभी के लिए एक बड़ा संदेश है जो बार-बार असफल होने पर निराश हो जाते हैं। उनके माता-पिता सरकारी शिक्षक रहे हैं और मुनीब अपनी सफलता का श्रेय उन्हीं के अटूट समर्थन को देते हैं।
उनकी सफल तैयारी की रणनीति
मुनीब भट्ट अपनी तैयारी की रणनीति को सरल बताते हैं। उनका कहना है कि सफल होने के लिए सिर्फ एक ही तरीका है – बुनियादी चीजों से जुड़े रहना।
किताबें सीमित रखें: उन्होंने NCERT की किताबों पर अच्छी पकड़ बनाई।
अखबार पढ़ना: मुनीब के अनुसार, अखबार पढ़ना उनकी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
उत्तर लेखन अभ्यास: मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने नियमित रूप से उत्तर लिखने का अभ्यास किया।
वह उम्मीदवारों को सलाह देते हैं कि वे इस परीक्षा को केवल जुनून के कारण चुनें, किसी बाहरी दबाव या दिखावे के कारण नहीं। उनका मानना है कि सफलता के लिए 10-12 घंटे की पढ़ाई, अनुशासन और माता-पिता का समर्थन बहुत जरूरी है। मुनीब की यह कहानी कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा है।





