भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लोग शिवलिंग की पूजा करते है। क्योंकि शिवलिंग महादेव का एक प्रतीक है। शिवलिंग को लोग मंदिर में भी स्थापित करते हैं और घर में भी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदिर और घर के शिवलिंग में क्या अंतर होता है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में दोनों जगह शिवलिंग रखने के नियम व महत्व भी अलग-अलग होते हैं।
मुख्य अंतर
मंदिर और घर के शिवलिंग में मुख्य अंतर यह है कि मंदिर में शिवलिंग को बड़े और विशाल रूप में स्थापित किया जाता है। यहां नियमित रूप से पूजा-पाठ और आरती होती है। जबकि घर में एक छोटा शिवलिंग स्थापित होता है। उसकी देखभाल और पूजा के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है।
घर में शिवलिंग रखने के नियम
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक घर में एक निश्चित आकार का शिवलिंग स्थापित करना चाहिए। घर में रखने से पहले इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि शिवलिंग अंगूठे के आकार का होना चाहिए। घर में कभी भी टूटा हुआ शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। घर में शिवलिंग की स्थापना ऐसे करें कि उसका मुख ईशान कोण की तरफ हो। वास्तु के मुताबिक घर में एक से ज्यादा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। घर में सोने, चांदी, पीतल, मिट्टी, एल्युमिनियम धातु के शिवलिंग रखना शुभ माना जाता है।
घर में शिवलिंग रखने का महत्व
शिवलिंग का घर में होना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और खुशहाली आती है। यह घर में शांति बनाए रखने और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी ताल-मेल बनाए रखने में मदद करता है। मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा करने से दिल की हर मुराद पूरी होती है.
मंदिर में शिवलिंग का महत्व
वहीं, मंदिर में शिवलिंग का विशेष महत्व होता है। क्योंकि भगवान शिव निराकार हैं और यह शिवलिंग उनके इसी निराकार, अनंत और असीमित स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास है। ऐसे में मंदिर में शिवलिंग की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। मंदिर में शिवलिंग की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, साथ ही अध्यात्मिक शांति मिलती है जिससे सोचने-समझने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है





