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पानी वाली रोटी कैसे बनाएं? जानें इस पारंपरिक रोटी को बनाने का तरीका और खाने के फायदे

आज मैं आपको एक ऐसी चीज़ के बारे में बताने जा रही हूं जो बहुत से लोगों के गांवों में आज भी बड़े चाव से खाई जाती है जी हां, मैं बात कर रही हूं पानी वाली रोटी की. जब बचपन में मैं अपनी मम्मी को दादी के लिए हाथ में पानी लगाकर रोटी बनाते देखती थी तो समझ नहीं आता थी कि दादी ये रोटी खाना क्यों पसंद करती हैं. लेकिन आज अचानक से मुझे रोटी बनाते समय हाथ में पानी लगाकर रोटी बनाने का किस्सा याद आया और फिर मैंने उसे बनाने की कोशिश की. हुआ यूं कि मम्मी जितनी शानदार तो नहीं बनी,  फिर क्या था मोबाइल उठाया और मम्मी को कॉल करके इसे बनाने का तरीका पूछ लिया. लेकिन यकीन मानिए, एक बार हाथ की कला आ गई तो आप बार-बार यही बनाएंगे. आइए जानते हैं इसे बनाने का एकदम आसान तरीका और इसके फायदे.

​पानी वाली रोटी बनाने का आसान तरीका-

  1. ​सबसे पहले गेहूं का आटा लें. इसे थोड़ा सा नरम गूंथ लें. जितना अच्छा आटा गूंथेंगे, रोटी उतनी ही बढ़िया बनेगी. अब आटे की थोड़ी बड़ी लोई तोड़ लें.
  2. अब अपने दोनों हाथों में थोड़ा सा साफ पानी लगा लें इसके बाद लोई को हथेली पर रखकर उंगलियों की मदद से गोल-गोल थपथपाना शुरू करें.
  3. बीच-बीच में हाथों में पानी लगाते रहें ताकि आटा हाथों में चिपके नहीं और आसानी से फैल जाए. धीरे-धीरे इसे गोल और थोड़ा मोटा फैला लें.
  4. तवे को मीडियम आंच पर गर्म करें. अब रोटी को बड़े आराम से उठाकर तवे पर डाल दें. जब एक तरफ से हल्की सिंक जाए, तो इसे पलट दें.
  5. जब दोनों तरफ से हल्के भूरे धब्बे दिखने लगें, तो इसे सीधे आंच पर अच्छे से सेंक लें. लीजिए, गरमा-गरम पानी वाली सॉफ्ट  तैयार है.

    पानी वाली रोटी खाने के फायदे-

    • जब मैंने मम्मी को कॉल किया और उनसे इस रोटी को बनाने के बारे में पूछ रही थी, तभी मम्मी ने मुझे बताया कि दादी इस रोटी को क्यों खाती थी.
    • ​इस रोटी को बनाने में किसी सूखे आटे का इस्तेमाल नहीं होता और हाथों के पानी से यह बनती है, इसलिए यह पेट में भारी नहीं होती. इस रोटी को खाने के बाद दादी को गैस या एसिडिटी की दिक्कत नहीं होती थी.
    • ​इसमें किसी भी तरह के तेल या घी की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आप फैट कम करना चाहते हैं या वजन घटाने की सोच रहे हैं, तो यह कम कैलोरी वाली रोटी आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है.
    • मम्मी ने बताया कि बेलन से बनी रोटियां ठंडी होने के बाद कड़क हो जाती थी, जिन्हें चबाने में दादी को दिक्कत होती थी. लेकिन पानी के हाथ की बनी रोटी काफी देर तक एकदम नरम और मुलायम बनी रहती है, जिसे खाना उनके लिए आसान था.

    (यह लेख लेखक के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है. अपनी डाइट में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.)

Manoj Mishra

Editor in Chief

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