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नीदरलैंड के यूट्यूबर ने भारत की फर्स्ट एसी ट्रेन में किया सफर, खाना खाकर कहा- ‘ये अनुभव हमेशा याद रहेगा’

मुंबई से अमृतसर के बीच 1,500 किलोमीटर की दूरी और 26 घंटे का लंबा सफर. नीदरलैंड के यूट्यूबर ने अपने यूट्यूब चैनलपर भारत की ट्रेन यात्रा से जुड़ा वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्हें ट्रेन के साथ-साथ भारतीय लोगों को करीब से जानने का मौका मिला. यूट्यूबर को हिंदुस्तानी लोगों के प्यार और अपनेपन ने इमोशनल कर दिया. उन्होंने “26 HOURS on India’s First Class Luxury Sleeper Train from Mumbai to Amritsar” नाम के वीडियो से अपनी जर्नी सुनाई है.

नॉनवेज के नाम पर परोस दी एग बिरयानी

पेड्रो मोटा ने फर्स्ट एसी ट्रेन का बेहद ही बारिकी से अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि सफर की शुरुआत में उम्मीद थी कि फर्स्ट एसी में सब कुछ मुफ्त और फाइव-स्टार जैसा मिलेगा. लेकिन ट्रेन में कदम रखते ही समझ आ गया कि यहां ‘पे एज यू गो’ सिस्टम है, यानी हर चीज के अलग से पैसे लगेंगे. डिनर में जब नॉन-वेज के नाम पर सिर्फ ‘एग बिरयानी’ सामने आई, तो विदेशी मेहमान हैरान रह गया. बिरयानी का स्वाद भी काफी फीका और साधारण निकला.

जब देसी परिवार ने सिखाया मां का प्यार

इसके बाद पेड्रो बताते है कि भारतीय ट्रेनों की असली जान डिब्बों में नहीं, लोगों में बसती है. उसी कोच में पानीपत की शादी में जा रहा 15 लोगों का भरा-पूरा संयुक्त परिवार सफर कर रहा था. इस परिवार ने विदेशी यूट्यूबर को बिल्कुल पराया नहीं लगने दिया. घर से लाई गई ताजी रोटियां, आलू की सब्जी और दाल-चावल इतने प्यार से परोसे कि यूट्यूबर बोल पड़ा, “यह मां के हाथ का स्वाद है, जिसके आगे ट्रेन का खाना कुछ भी नहीं.”

फरीदाबाद में मिले गर्म समोसे और कड़क चाय

अगली सुबह की शुरुआत कॉफी की खोज से हुई. पेड्रो ने पैंट्री कार देखने की उम्मीद में आधा किलोमीटर ट्रेन नाप ली, लेकिन पता चला कि वहां बैठकर खाने-पीने की जगह नहीं है, ये सिर्फ चलती-फिरती रसोई है. आखिरकार फरीदाबाद स्टेशन पर जब गरमा-गरम समोसे और कड़क चाय मिली, तब जाकर राहत मिली.

यूट्यूबर ने चलती ट्रेन में शॉवर ले लिया

सफर का सबसे अनोखा हिस्सा रहा फर्स्ट एसी के वॉशरूम में लगा शॉवर. यूट्यूबर ने नहाने की कोशिश की, तो पहले कड़ाके की ठंड में बर्फ जैसा ठंडा पानी गिरा और हाथ से साबुन फिसल गया. हालांकि, थोड़ी देर में हल्का गर्म पानी आने लगा. यह कोई लग्जरी स्पा तो नहीं था, लेकिन 26 घंटे की थकान मिटाने के लिए काफी था.

भारतीय लोगों की जिंदादिली के कायल हुए पेड्रो

दिल्ली और हरियाणा में जब साथी यात्री उतर गए, तो पूरा केबिन खाली हो गया. 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन में सुकून से काम करना और खिड़की से पंजाब के हरे-भरे खेतों में ढलते सूरज को देखना इस सफर का सबसे खूबसूरत हिस्सा रहा. 26 घंटे बाद अमृतसर पहुंचने तक फाइव-स्टार सुविधाएं भले न मिली हों, लेकिन भारत का अपनापन और जिंदादिली इस सफर को यादगार बना गई.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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