छत्तीसगढ़

*कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न*

*कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न*

*वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों एवं समन्वित फसल प्रबंधन से कम लागत में अधिक उत्पादन पर दिया गया जोर*

कवर्धा,  अगस्त 2026। कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषि विभाग के पंडरिया एवं बोड़ला विकासखंड में सेवारत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपसंचालक कृषि श्री अमित मोहंती एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण के प्रारंभ में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने कृषि विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य खरीफ फसलों में समन्वित पौध प्रबंधन तथा वैज्ञानिक कृषि विधियों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करना है। उन्होंने खरीफ फसलों में रोग एवं कीट प्रबंधन के साथ-साथ किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रशिक्षण के दौरान धान की फसल में होने वाले प्रमुख रोगों की पहचान एवं उनके नियंत्रण के संबंध में उपयोगी जानकारी दी गई। धान में झुलसा रोग के लक्षण आंख या नाव के आकार के दिखाई देने पर पोटाश 10 किलोग्राम प्रति एकड़ एवं ट्राइसाइक्लाजोल 120 ग्राम प्रति एकड़ के छिड़काव की सलाह दी गई। इसी प्रकार जीवाणु जनित झुलसा रोग में पत्तियों के ऊपर से नीचे की ओर टी आकार में या किनारों से सूखने के लक्षण दिखाई देने पर स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 12 ग्राम एवं मैनकोजेब 250 ग्राम के छिड़काव की जानकारी दी गई। धान में भूरा धब्बा रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैनकोजेब 250 ग्राम अथवा ट्राइसाइक्लाजोल 120 ग्राम के उपयोग की सलाह दी गई।
उपसंचालक कृषि श्री अमित मोहंती ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ जिले के अधिक से अधिक कृषकों तक पहुंचाने तथा योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी को मैदानी स्तर पर किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के विषय वस्तु विशेषज्ञों द्वारा खरीफ फसलों में खरपतवार, जल एवं उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य एवं जैविक खेती, उद्यानिकी फसलों की उत्पादन तकनीक, प्रक्षेत्र योजना एवं प्रक्षेत्र अभिलेख, पशुओं में होने वाले संक्रामक रोग एवं उनके निदान तथा प्रमुख कृषि यंत्रों के उपयोग सहित विभिन्न विषयों पर श्रव्य-दृश्य माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षणार्थियों को कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेत्र फार्म का भ्रमण भी कराया गया। यहां बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत चैड़ी क्यारी एवं मांदा विधि से की जा रही सोयाबीन की खेती का अवलोकन कराया गया। इसके अलावा औषधीय रोपणी तथा क्रॉप कैफेटेरिया में धान, सोयाबीन, मूंग एवं उड़द की उन्नत किस्मों का प्रदर्शन दिखाया गया।
प्रशिक्षणार्थियों ने प्रक्षेत्र में स्थापित समन्वित कृषि प्रणाली के अंतर्गत मुर्गी पालन इकाई, पशुधन उत्पादन इकाई तथा मछली सह-बत्तख पालन इकाई का भी भ्रमण किया। इस दौरान विभिन्न कृषि गतिविधियों को आपस में जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के संबंध में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, बीटीएम एवं एटीएम सहित कुल 50 प्रतिभागी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि विभाग के मैदानी अमले को नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराकर इनका प्रभावी हस्तांतरण किसानों तक सुनिश्चित करना रहा।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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