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निर्मल पुर्जा समेत चार पर्वतारोहियों के शव बेस कैंप पहुंचे, 8000M पर चला रिकवरी मिशन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान में ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन में मारे गए अनुभवी नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल पुर्जा और तीन अन्य पर्वतारोहियों के शवों को बुधवार को पहाड़ के बेस कैंप लाया गया. शवों को नीचे लाना एक बेहद मुश्किल काम था.

पुर्जा, जिन्हें ‘निम्स दाई’ के नाम से जाना जाता है, और नौ अन्य पर्वतारोही- जिनमें नेपाल से पांच, एक  , एक ओमानी, एक अमेरिकी और एक चीनी शामिल थे- पिछले गुरुवार को K2 के पास काराकोरम रेंज में स्थित ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे.शनिवार को, पुर्जा की अभियान कंपनी – ‘एलीट एक्सपेड’ – ने ऐलान किया कि समूह के सभी सदस्यों की मौत हो गई है.

नेपाल पर्वतारोहण संघ (NMA) के उपाध्यक्ष राजेंद्र बहादुर लामा ने बताया कि पुर्जा, चीन के झोंग वांग और नेपाली पर्वतारोहियों निमा शेरपा और किलो शेरपा के शवों को पहाड़ से निकालकर बेस कैंप लाया गया.

उन्होंने कहा, ‘इस मिशन का नेतृत्व मिंग्मा जी ने किया, जिसमें सिरबाज खान और समर्पित ग्राउंड रिकवरी टीम का सहयोग मिला. उनकी हिम्मत और पेशेवर रवैये ने बेहद मुश्किल हालात में भी इस अभियान को संभव बनाया.’

ब्रॉड पीक (8,051 मीटर) दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा पहाड़ है और इसे चढ़ाई के लिए सबसे मुश्किल चोटियों में से एक माना जाता है.

इतनी अधिक ऊंचाई पर बचाव अभियान चलाना खासकर खतरनाक होता है क्योंकि बर्फ की अस्थिर स्थिति, खड़ी चढ़ाई और मौसम का कोई भरोसा नहीं होता; इसके लिए अक्सर ऊंचाई पर बचाव कार्य करने वाली विशेष टीमों की जरूरत पड़ती है.

NMA ने पाकिस्तान सरकार, पाकिस्तान सेना, अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान और बचाव अभियान में शामिल अन्य सभी लोगों का आभार व्यक्त किया.

लामा ने PTI को बताया, “दो अन्य नेपाली पर्वतारोहियों के शव पहले ही पाकिस्तान के स्कार्दू पहुंच चुके हैं. ‘युक्ता’ के नाम से मशहूर पुर बहादुर गुरुंग का शव गुरुवार को काठमांडू पहुंचेगा.”

तीन अन्य पर्वतारोहियों – एक नेपाली, एक पाकिस्तानी और एक अमेरिकी – के शव अभी भी अधिक ऊंचाई पर फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा कि मुश्किल रास्तों और खराब हालात के कारण उन्हें नीचे लाने में और समय लग सकता है.

लामा ने बताया कि ओमानी पर्वतारोही नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हारथी का शव पहले ही ओमान भेजा जा चुका है.

पुर्जा, जिनका शव लगभग 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला था, ने दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियों पर सबसे तेजी से चढ़ाई करने का रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने 2019 में छह महीने में यह उपलब्धि हासिल की थी.

दो साल बाद उनकी यात्रा पर बनी नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री ’14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल’ के रिलीज होने के बाद वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हो गए. पुर्जा ने ब्रिटिश सेना में गोरखाओं के साथ और बाद में स्पेशल फोर्सेज में भी सेवा की थी.

इस बीच, पुर्जा द्वारा स्थापित चैरिटी संस्था ‘निम्सदाई फाउंडेशन’ ने ब्रॉड पीक हिमस्खलन के बाद एक फंड शुरू किया है, ताकि इस आपदा में मारे गए पांच माउंटेन गाइडों के परिवारों को आर्थिक मदद दी जा सके.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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