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परिवार का पेट पालने के लिए बेची सब्‍जी और चलाया ई-रिक्‍शा, संघर्ष की मिसाल Jhandu Kumar ने भारत को दिलाया पहला मेडल

नई दिल्‍ली। कहते है न कि संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती। इस बात को बिहार के झंडू कुमार ने एकदम सही साबित करके दिखाया। 28 साल के झंडू कुमार ने कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2026 में भारत को पहला मेडल दिलाया। कुमार ने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्‍पर्धा में ब्रॉन्‍ज मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया।

पोलियो से उबरने वाले झंडू कुमार ने स्‍पर्धा में 181 किग्रा और 190 किग्रा के वजन सफलतापूर्वक उठाकर 130.9 प्‍वाइंट्स बनाए। वो 196 किग्रा का निर्णायक प्रयास पूरा नहीं कर सके।

इस स्‍पर्धा में भारत के अन्‍य एथलीट सुधीर थे, जो 114.1 अंक के साथ छठे स्‍थान पर रहे। नाइजीरिया के इदरिस रिलुवान ने 132.8 प्‍वाइंट्स के साथ गोल्‍ड मेडल जीता। इंग्‍लैंड के मैथ्‍यू हार्डिंग ने 131 अंक के साथ सिल्‍वर मेडल जीता।

जीत से गदगद हुए कुमार

झंडू कुमार ने मेडल जीतने की खुशी बयां करते हुए कहा, ‘मैं अपनी खुशी बयां नहीं कर सकता। सबसे पहले मैंने घर में अपने माता-पिता को फोन किया। इसके बाद मैंने गौतम भैया को फोन किया, जो बचपन से मेरे साथ हैं। इन्‍हीं के साथ बचपन से मैंने अभ्‍यास किया। यह भारत के लिए महत्‍वपूर्ण पदक है क्‍योंकि पहला मेडल है। जब मैंने अपने देश के झंडे को देखा तो बहुत खुशी हुई।’

कौन हैं झंडू कुमार

झंडू कुमार ने संघर्ष करके यहां तक की यात्रा तय की। बिहार के नालंदा जिले के हरनौत में जन्‍में झंडू पोलियो से ग्रस्‍त थे। झंडू का परिवार संघर्षभरा जीवन जीता आया। उनके पिता सड़क किनारे सब्जियां बेचते थे। झंडू ने भी अपने पिता का साथ निभाया और सब्‍जी बेची। कोविड-19 महामारी के दौरान परिवार का पेट पालने के लिए झंडू कुमार ने ई-रिक्‍शा भी चलाया।

झंडू कुमार की खेल यात्रा का शुभारंभ 2017 में पैरा एथलेटिक्‍स के जरिये हुआ, जहां उन्‍होंने एफ55 शॉटपुट और डिस्‍कस थ्रो इवेंट में हिस्‍सा लिया। तब उन्‍होंने जिला और राज्‍य स्‍तर पर कई मेडल जीते। हालांकि, जिम में ताकत वाले सत्र करने से पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार का जुनून बढ़ा और उन्‍होंने पूरी तरह इस खेल को अपनाया।

झंडू कुमार के बारे में प्रमुख बातें

  • जन्‍म से ही पोलियो से प्रभावित
  • सब्‍जी बेचने वाले के बेटे
  • खुद भी सड़क किनारे बेची सब्‍जी
  • कोविड-19 के दौरान ई-रिक्‍शा ड्राइवर बने
  • अपने खर्चे पूरे करने के लिए ई-रिक्‍शा बेचा
  • अब भारत को सीडब्‍ल्‍यूजी 2026 में पहला मेडल दिलाया

बेच दिया कमाई का साधन

झंडू कुमार का राष्‍ट्रीय चैंपियनशिप में डेब्‍यू अच्‍छा नहीं रहा। वो सफलतापूर्वक भार नहीं उठा सके थे। 2023 में उन्‍हें अपना ई-रिक्‍शा बेचना पड़ गया ताकि खेल को जारी रख सके। पैरालिंपिक ब्रॉन्‍ज मेडलिस्‍ट रजिंदर सिंह राहेलु की तब झंडू कुमार पर नजरें पड़ी।

झंडू कुमार को राहेलु के मार्गदर्शन में गांधीनगर के साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्‍सीलेंस में ट्रेनिंग के लिए आमंत्रित किया गया। यहां से उनकी जिंदगी बदल गई। झंडू कुमार ने 72 किग्रा वर्ग में भारत के प्रमुख लिफ्टर के रूप में अपनी छवि स्‍थापित की। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय चैंपियनशिप्‍स में 205 किग्रा वजन उठाकर राष्‍ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और फिर खेलो इंडिया पैरा गेम्‍स में 206 किग्रा का वजन उठाया।

इसके बाद 2026 बीजिंग वर्ल्‍ड और 2026 एशियन एंड ओशियाना चैंपियनशिप्‍स में ब्रॉन्‍ज मेडल जीतकर झंडू कुमार ने अपनी उपयोगिता साबित की। झंडू कुमार का लक्ष्‍य 2028 लॉस एंजिल्‍स पैरालिंपिक गेम्‍स में मेडल लाना है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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