मधुबनी. अगर कोई यह कहे कि एक ही रोटी खाने से शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, कैल्शियम, कैलोरी और कई तरह के पोषक तत्व मिल सकते हैं, तो आपको ताज्जुब होगा. लेकिन ऐसा हो सकता है. आज हम आपको एक ऐसी ही 7 प्रकार के अनाज से तैयार होने वाली मोटी रोटी के बारे में जानकारी देते हैं और बताते हैं कि अनाज धोने से लेकर पकाने तक की पूरी प्रक्रिया कैसी होती है
एक रोटी और सेहत फिट
मिथिलांचल का देसी और पारंपरिक खाना आज भी डॉक्टरों की सलाह जैसा माना जाता है, जिसे आम लोग, खासकर मिथिला के ग्रामीण लोग खाते हैं और तंदुरुस्त रहते हैं. ऐसा भोजन जिसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, स्वास्थ्य के लिए काफी बेहतर होता है और डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं. लेकिन यह कोई नई चीज नहीं है. यहां लोग इसे लंबे समय से पारंपरिक भोजन के रूप में खाते आ रहे हैं. यह है सतंजा रोटी. इसका आटा कैसे तैयार होता है, आइए जानते हैं पूनम देवी से.
7 अनाज और मिट्टी का चूल्हा
यह मिथिलांचल की ऐसी देसी रोटी है जिसमें बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. सतंजा रोटी के लिए आटा तैयार करने की पुरानी पारंपरिक विधि आज भी अपनाई जाती है. इसमें रसोई गैस नहीं, बल्कि मिट्टी के चूल्हे पर अनाज को गर्म किया जाता है और फिर उसका आटा तैयार किया जाता है.
मिट्टी के चूल्हे पर होती तैयार
सतंजा नाम से ही साफ है कि इसमें 7 तरह के अनाज मिलाए जाते हैं. इसमें अरवा चावल, उसना चावल, गेहूं, मक्का, मसूर दाल, काला चना, खेसारी दाल और चूड़ा आदि को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाया जाता है. इसके बाद मिट्टी के चूल्हे पर इन अनाजों को गर्म किया जाता है और फिर इनका आटा पिसवाया जाता है. इसके बाद इसकी मोटी रोटी बनाकर नमक, तेल और हरी मिर्च के साथ खाया जाता है.
बता दें कि यह रोटी खाने में स्वादिष्ट लगती है और इसमें कई ऐसी चीजें शामिल होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं. आप भी इस देसी और पारंपरिक तरीके से बनी सतंजा रोटी का स्वाद अपने घर में इस विधि से बना कर ले सकते हैं




