छत्तीसगढ़

दूरस्थ वनांचल क्षेत्र तक पहुंच रहा शासन-प्रशासन

*सुशासन तिहार 2026: सुशासन शिविर में दिव्यांगजनों को मिला आत्मनिर्भरता का सहारा*

*दूरस्थ वनांचल क्षेत्र तक पहुंच रहा शासन-प्रशासन*

*दिव्यांगजनों को मिली ट्रायसाइकिल और पेंशन स्वीकृति*

कवर्धा,  मई 2026। सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणाम अब दूरस्थ वनांचलों तक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता न केवल लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रही है, बल्कि उनके जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान भी लौटा रही है। विशेषकर दिव्यांगजनों और जरूरतमंद हितग्राहियों के लिए राहत का माध्यम बनते जा रहे हैं। शिविरों में तत्काल आवेदन पर दिव्यांगजनों को ट्रायसाइकिल तथा पात्र हितग्राहियों को पेंशन स्वीकृति मिलने से उनके हौसलों को नई मजबूती मिल रही है।
जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत सुदूर ग्राम झलमला में आयोजित सुशासन शिविर में 05 दिव्यांगजनों को ट्रायसाइकिल एवं 04 हितग्राहियों को नवीन पेंशन स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ट्रायसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में श्रीमती समरीन बाई मरकाम, श्री गणेश मरकाम, श्री फागुराम, श्रीमती रमली बाई एवं श्री अमृत लाल शामिल हैं। वहीं श्रीमती चंद्रकला यादव, प्रभु, कामभो एवं अमर लाल को पेंशन स्वीकृति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इन दिव्यांगजनों को पहले आवागमन के लिए बैसाखियों का सहारा लेना पड़ता था। दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वे परिवार पर निर्भर थे, जिससे उनके आत्मसम्मान पर भी प्रभाव पड़ता था। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र होने के कारण आवाजाही में भी उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
सुशासन तिहार शिविर में हितग्राहियों ने ट्रायसाइकिल और पेंशन के लिए आवेदन दिया था। प्रशासन ने इन आवेदनों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से शिविर स्थल पर ही ट्रायसाइकिल और पेंशन स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरित किए। ट्रायसाइकिल मिलने से अब दिव्यांगजन आसानी से आ-जा सकेंगे और अपने जरूरी काम स्वयं कर पाएंगे। वहीं पेंशन स्वीकृत होने से हितग्राहियों को आर्थिक सहारा मिलेगा, जिससे उनका जीवन अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनेगा। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का त्वरित समाधान हुआ है और उन्हें नई उम्मीद मिली।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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