देश दुनिया

प्लांट बनने से पहले ही बुक हो गए सारे सेमीकंडक्टर, आज लगी पहली ईंट, 2.5 साल में बनकर तैयार होगी फैक्ट्री

नई दिल्ली. भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को लेकर एक और बड़ा कदम सामने आया है, लेकिन इस बार खास बात सिर्फ प्लांट लगने की नहीं, बल्कि उसके बनने से पहले ही उसकी पूरी क्षमता की एडवांस बुकिंग हो जाना है. यानी जिस फैक्ट्री का निर्माण अभी शुरू हुआ है, उसके प्रोडक्शन के लिए पहले से ही मांग तैयार है, जो इस सेक्टर में बढ़ती जरूरत और भरोसे को दिखाता है. ओडिशा में बनने जा रहा यह सेमीकंडक्टर प्लांट न सिर्फ राज्य के औद्योगिक नक्शे को बदलने वाला है, बल्कि यह भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए भी एक अहम संकेत है कि देश अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि हाई-एंड चिप मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की ओर तेजी से बढ़ रहा है.केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने शिलान्यास के दौरान बताया कि इस प्लांट के भविष्य के प्रोडक्शन की एडवांस बुकिंग पहले ही हो चुकी है. इसका मतलब है कि प्लांट के शुरू होते ही उसकी क्षमता का इस्तेमाल सुनिश्चित रहेगा, जिससे बिजनेस वायबिलिटी मजबूत होती है. यह प्लांट बनने में करीब 2.5 साल का समय लेगा, लेकिन बाजार में इसकी मांग पहले से मौजूद है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका को दिखाती है.

पारंपरिक नहीं, एडवांस टेक्नोलॉजी

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी टेक्नोलॉजी है. आमतौर पर सेमीकंडक्टर निर्माण में सिलिकॉन सबस्ट्रेट का इस्तेमाल होता है, लेकिन इस प्लांट में 3डी ग्लास सबस्ट्रेट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा. यह टेक्नोलॉजी ज्यादा एडवांस मानी जाती है और भविष्य के हाई परफॉर्मेंस चिप्स के लिए जरूरी है. भारत में इस तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पहली बार बड़े स्तर पर किया जा रहा है.

कितना होगा निवेश और उत्पादन

इस प्रोजेक्ट में शुरुआती चरण में करीब 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. प्लांट के पूरी तरह चालू होने के बाद यहां हर साल 70,000 ग्लास पैनल, 50 मिलियन असेंबल्ड यूनिट और 13,200 3डी एचआई मॉड्यूल का उत्पादन किया जाएगा. इसके साथ ही इस परियोजना से 2,500 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा होगा.

ओडिशा के लिए क्या बदलेगा

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी (Mohan Charan Majhi) ने इसे राज्य के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया. अब तक ओडिशा की पहचान मुख्य रूप से खनिज और धातु आधारित उद्योगों से रही है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के साथ राज्य हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. यह बदलाव ओडिशा को देश के प्रमुख आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है.भारत में पहले भी सेमीकंडक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट्स घोषित हुए हैं, लेकिन यह प्लांट खास इसलिए है क्योंकि इसमें 3डी ग्लास सबस्ट्रेट पैकेजिंग जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल होगा. अब तक ज्यादातर प्रोजेक्ट्स असेंबली, टेस्टिंग या पारंपरिक सिलिकॉन आधारित प्रोसेस तक सीमित थे, जबकि यह प्लांट अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी पर फोकस करता है. यही वजह है कि इसका प्रोडक्शन शुरू होने से पहले ही बाजार में इसकी डिमांड बन चुकी है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button