देश दुनिया

उम्र सिर्फ नंबर, हौसला जवान; बिलासपुर में 96 साल की परसिनो और 86 वर्ष की बंती देवी ने दी साक्षरता परीक्षा

पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती, इस कहावत को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले की दो बुजुर्ग महिलाओं ने सच कर दिखाया है। ‘उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत रविवार को आयोजित परीक्षा में 96 वर्षीय परसिनो देवी और 86 वर्षीय बंती देवी ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर समाज के सामने शिक्षा की एक नई अलख जगाई है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य निरक्षर लोगों को बुनियादी शिक्षा देकर साक्षर घोषित करना है।

96 की उम्र में घर से दी परीक्षा

सदर उपमंडल के रघुनाथपुरा गांव की परसिनो देवी (96) चलने-फिरने में असमर्थ हैं, लेकिन उनके सीखने के जज्बे को देखते हुए शिक्षा विभाग ने विशेष व्यवस्था की और घर जाकर उनकी परीक्षा ली। परसिनो ने बताया कि उनके बचपन में स्कूल दूर होने और लड़कों की पढ़ाई को प्राथमिकता मिलने के कारण वह कभी स्कूल की दहलीज नहीं लांघ पाईं। रघुनाथपुरा स्कूल के अध्यापकों के प्रोत्साहन से उन्होंने न केवल पंजीकरण कराया, बल्कि कड़ी मेहनत कर परीक्षा के लिए खुद को तैयार किया। उनका कहना है, “शिक्षा जीवन का आधार है, यदि बचपन में मौका मिला होता तो आज अपने पैरों पर खड़ी होती।”

दादी सास को बहू ने बनाया साक्षर

वहीं, मंगरोट गांव की बंती देवी (86) के लिए उनकी पोत-बहू रेणु प्रेरणास्रोत बनीं। पेशे से अध्यापिका रेणु ने अपनी दादी सास को साक्षर करने का बीड़ा उठाया और घर पर ही उन्हें पढ़ाई करवाई। बंती देवी ने परीक्षा केंद्र पहुंचकर पेपर हल किया और खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब वह पैसों का हिसाब करने और बस आदि के बोर्ड पढ़ने में सक्षम हो गई हैं। गरीबी के कारण बचपन में शिक्षा से वंचित रही बंती देवी अपने पोते-पोतियों को पढ़ते देख हमेशा से साक्षर होने का सपना बुनती थीं।

क्या है उल्लास कार्यक्रम?

‘उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत उन लोगों को बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्रदान किया जाता है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं। बिलासपुर में यह तीसरा मौका था जब इस तरह की परीक्षा का आयोजन किया गया।

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button