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सड़क किनारे सूख रहे पेड़, काटे भी जा रहे वन विभाग और एनएच कर रहे दोषारोपण

एनएच किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए लगाए गए पेड़ों की देखरेख में भारी लापरवाही सामने आई है। हालात यह है कि कई जगह पेड़ सूख गए, कुछ जल गए और कुछ को काट लिए गए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। एनएच व वन विभाग इसको लेकर एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं।

ताजा मामला चैलाहा में एनएच किनारे का है, जहां वन विभाग द्वारा लगाए गए करीब दो दर्जन पीपल के पेड़ आग लगने से जल गए है। कई पेड़ों को आसपास के लोग काटकर ले गए, जबकि करीब 14 पेड़ अब भी सूखे खड़े हैं। इसी तरह चैलाहा से सिसवनिया के बीच भी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां करीब 12 वर्ष पहले मनरेगा से सड़क किनारे लगाए गए पेड़ शुरू में अच्छी तरह बढ़े, लेकिन वन विभाग को हैंडओवर होने के बाद उनकी देखरेख नहीं हुई। आसपास के बकरी पालक लगातार ऊपर से टहनियां काटते रहे, जिससे कई पेड़ सूखने लगे और उनकी वृद्धि रुक गई। स्थानीय लोगों के अनुसार नगर निगम द्वारा फेंके गए कचरे में आग लगने से यह स्थिति बनी। कचरे में करीब दो सप्ताह तक आग सुलगती रही और धुएं के कारण एनएच पर चलना मुश्किल हो गया था। इसके बावजूद न तो एनएच विभाग और न ही वन विभाग के किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने या पेड़ों को बचाने का प्रयास किया। उस समय के थानाध्यक्ष ने टंकी से पानी डलवाया था। लेकिन आग पूरी तरह नहीं बुझ सकी और पेड़ जलकर सूख गए। इतनी संख्या में पेड़ों के जलने के बाद भी न तो एनएच ने कार्रवाई की न ही वन विभाग ने। जबकि एक पौधा काटे जाने पर वन विभाग त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कर देता हैं। ऐसे में स्थानीय लोग वन विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग पेड़ों की हो रही कटाई पर आंख बंद कर लिया है।

पर्यावरणविद् केशव कृष्णा ने बताया कि जिले में धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई चल रही है। खेत में, सड़क किनारे, बाग-बगीचों में पेड़ काटे जा रहे हैं। सबसे अधिक सरकारी पेड़ को हानि पहुंचाई जा रही है। मनरेगा व वन विभाग पौधरोपण पर लाखों खर्च कर रहा है। डीएफओ से पूछा गया कि हरा पेड़ काटने पर आम लोगों पर प्राथमिकी होती है, तो सरकारी पेड़ जलने पर कार्रवाई क्यों नहीं, तो उन्होंने कहा कि चैलाहा में एनएच किनारे की जमीन एनएच की है, इसलिए प्राथमिकी भी एनएच को ही दर्ज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग पेड़ की देखभाल करता है, लेकिन जमीन एनएच की होने के कारण कार्रवाई में दिक्कत होती है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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