कोरबा : कोरबा के राजेंद्र प्रसाद कॉलोनी में रहने वाले मनहरण लाल राठौर जो भारत अल्युमिनियम कंपनी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन्होंने अपने चार मंजिला घर की छत को पूरी तरह से एक मिनी‑फ़ार्म में बदल दिया है. आज‑कल जब बाज़ार में मिलने वाली अधिकांश सब्जियां रासायनिक तरीकों से उगाई जाती हैं और उनसे होने वाली स्वास्थ्य‑सम्बंधी परेशानियों को देखते हुए राठौर ने अपने परिवार के लिये शुद्ध, ऑर्गेनिक सब्जियाँ उगाने का फैसला किया.
छत को खेत बनाने की प्रेरणा
,मैं गांव का किसान का बेटा हूं, बचपन से ही खेती‑बाड़ी का शौक रहा है. रिटायरमेंट के बाद समय मिलने से मैंने अपनी छत को बाग़ में बदलने की सोची.अब हर दिन 2‑3 किलो तक गोभी, टमाटर, बैगन, करेला, प्याज़ सब्जियों की पैदावार होती है.
गाय का गोबर, किचन वेस्ट,का उपयोग
छत पर पहले पर्याप्त लेयरिंग की गई.फिर जैविक कंपोस्ट का लेयर डाला गया, जो राठौर स्वयं तैयार करते हैं.कंपोस्ट बनाने मे वे गाय का गोबर, किचन वेस्ट,का उपयोग करते है. ये सब्जियों को पोषक तत्व प्रदान करता है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता समाप्त कर देता है. बाग़ को दो‑तीन महीने में एक बार पत्तियों की छंटाई तथा बायो‑पेस्टिसाइड से कीट नियंत्रण करते है.राठौर की पत्नी भी इस काम में हाथ बटाती हैं जिससे यह परिवारिक सहयोग बन गया है.मनहरण लाल राठौर ने बताया कि वे इस बाग़ को और विस्तारित कर, मौसमी फल फूल और औषधीय जड़ी बूटियों को भी शामिल करने की योजना बना रहे हैं. वह चाहते हैं कि कोरबा में छत बाग़ की एक लहर चल पड़े, जिससे हर परिवार को ताज़ी, ऑर्गेनिक सब्जियों की पहुंच मिले और रासायनिक प्रदूषण से बचाव हो सके.





