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शीर्ष माओवादी नेता देवजी के सरेंडर की ख़बरों पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री ने क्या बताया

 , “बसवराजू के बाद देवजी ने ही कमान (हथियारबंद नक्सल आंदोलन की) संभाल रखी थी. ऐसी सूचना आ रही है कि देवजी ने आज तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर किया है. साथ ही, सेंट्रल कमेटी के मेंबर संग्राम उर्फ़ मूरली के भी सरेंडर की सूचना आ रही है.”

 तेलंगाना पुलिस के हवाले से ये पुष्टि की थी कि देवजी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है.

हालाँकि तेलंगाना पुलिस, तेलंगाना सरकार या केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक तौर पर इस ख़बर की पुष्टि नहीं की है.

विजय शर्मा ने कहा है कि 31 मार्च तक देश में हथियारबंद नक्सलवाद की समस्या समाप्त हो जाएगी.

पिछले साल मई में को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में पुलिस ने एक मुठभेड़ में 27 माओवादियों के साथ नंबाल्ला केशव राव उर्फ़ बसवराजू को मारने का दावा किया था. माओवादी पार्टी संगठन के मुताबिक़, मौजूदा समय में उनके सर्वोच्च नेता तिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवजी ही थे.माफ़ी चाहते हैं, हम इस स्टोरी का कुछ हिस्सा लाइटवेट मोबाइल पेज पर नहीं दिखा सकते.

देव जी के भाई तिप्पिरी गंगाधर ने स्थानीय मीडिया को बताया, “उनकी गिरफ़्तारी और मुठभेड़ की ख़बर चिंताजनक है. हमें नहीं पता कि सच्चाई क्या है. अगर वह पुलिस हिरासत में हैं, तो उन्हें बिना किसी नुक़सान के अदालत में पेश किया जाना चाहिए. हम चाहते हैं कि वह सुरक्षित रहें.”

देव जी के छोटे भाई की बेटी, तिप्पिरी सुमा ने इससे पहले उन्हें एक खुला पत्र लिखकर आत्मसमर्पण करने का अनुरोध किया था.उन्होंने लिखा था, “जब भी आपका नाम लिया जाता है, मुझे एक अजीब सा गर्व और पीड़ा का अहसास होता है. आपकी हिम्मत और दृढ़ता मुझे बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करती है. आप एक समतावादी समाज बनाने गए थे. हाल की घटनाओं को देखकर मैं बहुत चिंतित हूं. इन कठिन परिस्थितियों में आपकी वापसी की मैं तहे दिल से कामना करती हूं.”

इस लिहाज से देवजी का सरेंडर करना एक बड़ी घटना माना जा रहा है.

पिछले साल मई में पुलिस की गोलीबारी में नंबाल्ला केशव राव उर्फ़ बसवराजू की मौत के बाद देवजी ने पार्टी का पदभार संभाला था. वह वर्तमान में केंद्रीय समिति के महासचिव के पद पर थे.

कोरुटला के तिप्पिरी तिरुपति का जन्म वर्तमान जगतियाल ज़िले के एक दलित परिवार में हुआ था. वह 1980 के दशक में करीमनगर के एसआरआर कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में आ गए.

कॉलेज के दौरान छात्र संगठनों के बीच संघर्ष के बाद वह अंडरग्राउड हो गए.

तिरुपति (देवजी) करीमनगर क्षेत्र में सक्रिय थे और एक रेडिकल विद्यार्थी संगठन का हिस्सा बन गए.

प्रतिबंधित संगठन छोड़ने वाले एक करीमनगर निवासी ने बीबीसी को बताया, “1981-82 में, रायथु कुल्ली संगम ने एक विशाल सभा की थी. उस समय यह एक ऐतिहासिक सभा थी. इसका आयोजन तिरुपति ने ही किया था. बाद में, पार्टी ने उन्हें 1983-84 में दंडकारण्य भेजा.”

देवजी ने करीमनगर क़स्बे में और बाद में सिरोंचा क्षेत्र में माओवादी पार्टी आयोजक के रूप में काम किया. तिरुपति ने लगभग 15 वर्षों तक गढ़चिरौली में काम किया. उन्होंने वहां पार्टी के डिविजनल कमेटी के सदस्य के रूप में भी काम किया.

बाद में उन्हें 1993-94 के क्षेत्र में दंडकारण्य स्पेशन ज़ोनल कमेटी के सदस्य के रूप में चुना गया.

देव जी, जो 1990 के दशक के मध्य तक पार्टी को तैयार करने की प्रक्रिया में लगे रहे, बाद में सैन्य विंग की ओर मुड़ गए. तब से वह पार्टी के सशस्त्र विंग में ही बने रहे हैं.

सीपीआई (माओवादी) ने 1996 के आसपास दंडकारण्य में अपनी पहली प्लाटून का गठन किया. यह एक सैन्य गठन था. तिरुपति ने इसके पहले कमांडर के रूप में कार्य किया.

बाद में साल 2001 में, वे पार्टी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य बने. उस समय वे सेंट्रल कमेटी के सबसे युवा सदस्यों में से एक थे. केंद्रीय समिति के साथ-साथ, देवजी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के सदस्य भी बने.

उन्होंने माओवादी पार्टी में संजीव, चेतन, सुदर्शन और रमेश जैसे अलग-अलग नाम से काम किया.

एक पूर्व माओवादी ने बीबीसी को बताया, “साल 2004 में पीपुल्स वॉर के माओवादी बनने के बाद भी, वह केंद्रीय समिति और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में बने रहे. जब बसवराजू सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के प्रमुख थे, तब तिरुपति ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. साल 2018 में बसवराजू के केंद्रीय समिति के महासचिव पद बने सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के प्रमुख बन गए.”

छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों पर हुए कई बड़े हमलों में देवजी की प्रमुख भूमिका बताई जाती थी.

पार्टी के क़रीबी पर्यवेक्षकों का कहना है कि देवजी ने माओवादी सैन्य प्रशिक्षण और अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

ऐसा भी कहा जाता है कि पीएलजीए (पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) के गठन के पीछे उनका हाथ था.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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