देश दुनिया

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पसमांदा मुस्लिमों को OBC का दर्जा देने की याचिका, कहा- ‘ये कोर्ट का काम नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने पसमांदा मुसलमानों को OBC (पिछड़ा वर्ग) में शामिल करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि किसी नई जाति या समुदाय को आरक्षण की सूची में डालना सरकार और संसद का काम है, अदालत का नहीं.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पसमांदा मुसलमानों को भी ओबीसी के समान आरक्षण मिलना चाहिए. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘आप हमसे कानून बनाने के लिए कह रहे हैं. आप चाहते हैं कि हम मुसलमानों के एक विशेष वर्ग या श्रेणी को ओबीसी में शामिल करने पर विचार करें.’कोर्ट ने बताया कि ओबीसी का दर्जा सिर्फ जाति के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक कारकों के आधार पर तय होता है.

अदालत तय नहीं कर सकती श्रेणी

अदालत ने आगे बताया कि न्यायपालिका ये तय करने की स्थिति में नहीं है कि मुसलमानों की कौन-सी श्रेणी पिछड़ी है और कौन सी नहीं. CJI ने पूछा, ‘आप ये कहना चाह रहे हैं कि मुसलमानों की एक श्रेणी पिछड़ी है और दूसरी नहीं, हम ये कैसे तय कर सकते हैं?’आर्टिकल 32 के तहत नहीं हो सकता फैसला

याचिकाकर्ता के वकील ने आंध्र प्रदेश में मुसलमानों के भीतर ओबीसी वर्गीकरण और 4% आरक्षण से जुड़े एक लंबित मामले का हवाला दिया. इस पर बेंच ने बताया कि आर्टिकल 32 के तहत दायर याचिका में इस तरह के जटिल नीतिगत फैसले नहीं लिए जा सकते.अदालत ने कहा कि आरक्षण की सूची में किसी समुदाय को जोड़ना एक नीतिगत मामला है, जिसके लिए विस्तृत डेटा और सर्वेक्षण की जरूरत होती है.पसमांदा मुस्लिम समुदाय उन जातियों का समूह है जो सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े माने जाते हैं. लंबे समय से उन्हें मेन स्ट्रीम के आरक्षण का लाभ दिए जाने की मांग उठ रही है. लेकिन अब  ने साफ कर दिया है कि इसके लिए अदालत कुछ नहीं कर सकती.

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button