नई दिल्ली. अमेरिका के साथ ‘ट्रेड डील’ के बाद भारत ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में एक बड़ा दांव खेला है. रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सरकारी रिफाइनरी कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने का सौदा किया है. इसे एक बड़ा फैसला माना जा रहा है. सबसे बडी बात तेल पर भारत को बड़ी छूट मिलने की बात कही जा रही है. लेकिन यह डील थर्ड पार्टी के जरिये हुई है ऐसा क्यों है?
यह सौदा ट्रेड फर्म ट्रैफिगुरा के जरिए हुआ है. कुल 20 लाख बैरल कच्चे तेल में से IOC ने 15 लाख बैरल और एचपीसीएल ने 5 लाख बैरल लिए हैं. यह पहली बार है जब एचपीसीएल ने वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदा है. यह तेल अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में एक वेरी लार्ज क्रूड कैरियर के जरिए भारत के पूर्वी तट पर पहुंचेगा.
ट्रैफिगुरा के जरिये क्यों हुआ सौदा?
भारत ने वेनेजुएला से सीधे तेल न खरीदकर ट्रैफिगुरा जैसे ट्रेडर्स के जरिए सौदा किया है. इसके पीछे बड़ी वजह बताई जा रही है. एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद चुनिंदा ट्रेडर्स जैसे विटोल और ट्रैफिगुरा को ही तेल बेचने का विशेष लाइसेंस दिया है. सीधे सौदे में भुगतान और शिपिंग पर अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार लटकी रहती है. मध्यस्थ के जरिए लेनदेन करने पर भारतीय कंपनियों को कानूनी और वित्तीय जोखिम नहीं उठाना पड़ता. सीधे वेनेजुएला को डॉलर में भुगतान करना मुश्किल है, जबकि ग्लोबल ट्रेडर्स के जरिए अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम में पैसा देना आसान और सुरक्षित है.कितना सस्ता कितना महंगा
वेनेजुएला का मरे कच्चा तेल दुबई बेंचमार्क के आधार पर खरीदा गया है. माना जा रहा है कि 6.50 से 7 डॉलर प्रति बैरल की छूट सरकारी कंपनियों को मिल सकती है. तकरीबन इतनी ही छूट भारत को रूसी तेल पर भी मिल रही थी. खास बात यह है कि विटोल और ट्रैफिगुरा को अमेरिका से वेनेजुएला का तेल बेचने का विशेष लाइसेंस मिला हुआ है. भारत ने आधिकारिक तौर पर रूसी तेल बंद करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन वेनेजुएला से ये बड़ी खरीद साफ संकेत दे रही है कि भारत अब अमेरिका को नाराज किए बिना अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का ‘प्लान-बी’ तैयार कर चुका है





