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सरहद से कर्तव्य पथ तक… 26 जनवरी पर इतिहास रचेंगी 26 साल की सिमरन, सीमा पर गोलीबारी देखकर ज्वॉइन की थी फोर्स

जम्मू और कश्मीर के नौशेरा में जन्मी 26 साल की सिमरन बाला 26 जनवरी 2026 को इतिहास रचने जा रही हैं। असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला, 76वें गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर 140 से ज्यादा पुरुष CRPF टुकड़ी की कमान संभालेंगी। इतिहास में यह पहली बार है जब कोई महिला अधिकारी सीआरपीएफ जवानों के मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करेगी। सहरद से कर्तव्य पथ तक पहुंचने वाली सिमरन की   भारतीय सेनाओं में बढ़ती नारी शक्ति की मिसाल है।सिमरन बाला का जन्म 10 दिसंबर 1999 को जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले के बोर्डर टाउन नौशेरा हुआ था। सिमरन, देश की वो बेटी है जिसने सरहद पर रहकर भारतीय फोर्स में शामिल होने का सपना देखा और उसे पूरा किया। वे सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट पद पर हैं। उनका सफर दृढ़ संकल्प और शांत हिम्मत से भरा रहा है।सिमरन बॉर्डर से सटे शहर की रहने वाली हैं। उन्होंने सीमा पार (पाकिस्तान की ओर से) होने वाली गोलीबारी देखकर ठाना था कि उन्हें फोर्स में जाना है। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में सिमरन ने कहा था, ‘जम्मू और कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र से होने के कारण मैंने अपने क्षेत्र में सीमा पार से गोलीबारी देखी है, इसी ने मुझे सीएपीएफ में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। ताकि मैं सीमावर्ती क्षेत्र में भी सेवा कर सकूं।’सिमरन की स्कूलिंग जम्मू में हुई, लेकिन आगे की पढ़ाई जम्मू के ही गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वुमेन गांधीनगर से की। उन्होंने गांधीनगर कॉलेज से बैचलर डिग्री हासिल की है। अपने फाइनल सेमेस्टर में उन्होंने यूपीएससी एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग ( ) की सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) परीक्षा 2021 दी थी और पहले अटेंप्ट में 85वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की थी।कुल 151 कैंडिडेट्स सेलेक्ट हुए थे जिनमें सिमरन बाला भी शामिल थीं। सिमरन बाला, यूपीएससी सीएपीएफ एग्जाम पास करके फोर्स ज्वॉइन करने वाली जम्मू और कश्मीर की पहली लड़की हैं। वे न सिर्फ अपने क्षेत्र की बल्कि देश की तमाम बेटियों के लिए रोल मॉडल बन गई हैं।सिमरन की जाबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी पहली पोस्टिंग छत्तीगढ़ के नक्सल प्रभावित जंगलों में हुई। कमीशन मिलने के तुरंत बाद वे यहां आ गई थीं और ‘बस्तरिया बटालियन’ में शामिल हुईं। इस बटालियन को नक्सलियों का काल कहा जाता है। क्योंकि इस बटालियन में सिर्फ वही शामिल होते हैं जो घने जंगलों और किसी भी तरह के हालात से निपटना जानते हैं26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड में जब सिमरन बाला कर्तव्य पथ पर चलेंगी, वो कोई साधारण क्षण नहीं होगा। परेड देख रहे कई लोगों के लिए, यह एक शक्तिशाली दृश्य होगा- एक युवा महिला अधिकारी सामने से नेतृत्व कर रही है, जो एक नया बेंचमार्क सेट कर रही है। फोर्स के लिए, यह पल बदलती परंपराओं को दिखाएगा, जहां नेतृत्व को पूरी तरह से योग्यता के आधार पर पहचाना जाता है। यह पल उस बदलाव का प्रतीक होगा, जिसमें वर्दी वाली महिलाओं की अगली पीढ़ी के लिए नए रास्ते खुलते रहे होंगे। यह पल भारतीय सेनाओं में बढ़ती नारी शक्ति और जम्मू-कश्मीर की बदलती गौरवशाली तस्वीर का होगा

Manoj Mishra

Editor in Chief

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