चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के साथ ही विश्वविख्यात स्वर्णनगरी में पर्यटन के पहिए कुछ समय के लिए थम गए हैं। गर्मी के इस तीखे दौर के शुरू होते ही शहर और आस-पास के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वीरानी और सन्नाटा पसरने लगा है। सर्दियों में सैलानियों की भारी चहल-पहल से आबाद रहने वाले सोनार दुर्ग, गड़ीसर सरोवर, पटवों की हवेली और रेतीले धोरों पर अब पर्यटकों के कदम लगभग पूरी तरह से रुक चुके हैं।
सबसे ज्यादा असर मरुस्थलीय पर्यटन के मुख्य केंद्र सम और खुहड़ी में देखने को मिल रहा है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यहां धोरों के बीच बसी प्रसिद्ध टैंट सिटी में 95 प्रतिशत से अधिक रिसोर्ट और कैंप अब बंद किए जा चुके हैं। जो गिने-चुने 5 प्रतिशत रिसोर्ट खुले हैं, वे भी केवल इक्का-दुक्का एडवांस बुकिंग या कर्मचारियों द्वारा संपत्तियों के रख-रखाव मेंटेनेंस के कारण ही आंशिक रूप से संचालित हो रहे हैं। आगामी तीन महीनों तक शहर के पर्यटन क्षेत्र में ऐसा ही सन्नाटा पसरा रहेगा । रिकॉर्ड: इस बार रचा इतिहास, अब तक के पर्यटन इतिहास में सर्वाधिक सैलानी आए इस बार का पर्यटन सीजन जैसलमेर के पर्यटन उद्योग के लिए किसी स्वर्णिम काल से कम नहीं रहा। इस बार स्वर्णनगरी ने पर्यटकों की आवक के मामले में पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। अमूमन जैसलमेर में पर्यटन सीजन मार्च के अंत तक धीमा पड़ जाता है, लेकिन इस बार सैलानियों की आवक अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक जारी रही। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार 42 लाख देसी व 51 हजार विदेशी सैलानियों ने जैसलमेर का रुख किया। अब अगले तीन महीने जैसलमेर में भीषण गर्मी और लू का दौर रहेगा। पर्यटन व्यवसाय की भाषा में इसे पूरी तरह से ऑफ सीजन माना जाता है। इस दौरान पर्यटन से जुड़े व्यवसायी अपनी संपत्तियों को सुधारने और आगामी सीजन की नई तैयारियों में जुट जाएंगे। जैसलमेर में पर्यटन का सन्नाटा अब अगस्त महीने में टूटेगा। अगस्त में भादवा माह के दौरान लगने वाले बाबा रामदेव के विश्वविख्यात रामदेवरा मेले के साथ ही नई पर्यटन सीजन का शंखनाद हो जाएगा।





