प्रवीण एक बिज़नेसमैन हैं और अपनी लाइफ में अब बहुत खुश हैं. वे करोल बाग में अपनी एक शॉप और क्लिनिक चलाते हैं. बिज़नेस के दबाव, परिवार के लिए कम समय और काम से जुड़े तमाम उतार-चढ़ावों से वे अक्सर तनाव में रहते थे और खुद से सवाल करते थे कि लाइफ इतनी कठिन क्यों है, क्यों चीजें उनके जीवन में आसान नहीं हैं और क्यों हर बार उनके साथ ही कोई बुरी घटना हो रही है… इस तरह के ख्यालों से अक्सर प्रवीण खुद को परेशान कर लेते थे.
ऐसा अक्सर होता है, दिन भर की भागदौड़ के बाद जब इंसान पीछे मुड़कर देखता है, तो ध्यान अक्सर उन्हीं बातों पर जाता है जो ठीक नहीं हुईं. क्या कमी रह गई, किस बात का अफसोस है, या किससे तुलना हो रही है. धीरे-धीरे यही सोच मन की आदत बन जाती है. लेकिन अगर इसी पैटर्न को बदलकर रोज़ कुछ मिनट उन चीजों पर ध्यान दिया जाए जो पहले से अच्छी हैं, तो सोच का पूरा ढांचा बदलने लगता है.प्रवीण ने भी कुछ ऐसा ही किया. प्रवीण कहते हैं -प्रवीण कहते हैं कि एक बार तो मुझे उसकी बात चुभी, लेकिन उसके बाद मैंने सोचा कि बचपन का दोस्त है, क्यों न एक बार ट्रायल के लिए ही सही उसकी बात मान ली जाए.प्रवीण ने यह एक प्रयोग करके देखा और इसका उनके जीवन पर ऐसा असर हुआ कि अब वे सभी को ऐसा प्रयोग करने की सलाह देते हैं. उन्होंने ये प्रयोग महज 3 महीने के लिए शुरू किया था, लेकिन कब वह उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया, इसका पता उन्हें भी नहीं चला.इस दौरान जो भी बातें आपके साथ अच्छी हैं, उनके लिए कृतज्ञता व्यक्त करें. मन में कृतज्ञता का भाव आने से जीवन में कई पॉजिटिव चेंज आते हैं.इस बिज़नेसमैन ने बताया कि शुरुआत में आदतन वे नकारात्मक ही सोचते थे और कृतज्ञ होने और शुकराना करने के लिए उन्हें खुद को फोर्स करना पड़ता था. लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसकी आदत हो गई. इसका असर उनके बिजनेस पर भी दिखा और तनाव कम लेने से उनके रिश्ते सुधरे, जिससे आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई.





