शिवालिक क्षेत्र में शोध कर रही टीम ने सहंसरा नदी किनारे खोदाई में डायनासोर के अंडे मिलने का दावा किया है। सेंटर फोर वाटर पीस से जुड़ी शोध टीम के मुताबिक डायनासोर के अंडे करीब साढ़े छह करोड़ वर्ष पहले पाई जाने वाली थेरोपाड (दो पैरों पर चलने वाले मांसाहारी डायनासोर) प्रजाति के प्रतीत हो रहे हैं। इससे पहले भी सहंसरा नदी किनारे खोदाई में डायनासोर का सींग व अन्य जीवाश्म बरामद हो चुके हैं।सेंटर फोर वाटर पीस के शोध निदेशक उमर सैफ ने बताया कि शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित सहंसरा नदी घाटी पुरातात्विक दृष्टि से बेहद समृद्ध है। उन्होंने बताया कि संस्था के शोधकर्ता और विश्लेषक नोहा सैफ और कमलदीप ने नदी बेसिन क्षेत्र में लेट क्रेटेशियस काल (करीब 70 मिलियन वर्ष पहले) के दुर्लभ डायनासोर के अंडों के जीवाश्म खोज निकाले हैं।ये जीवाश्म लंबे अंडाकार आकृति के हैं तथा करीब 13 से 15 सेमी लंबाई के हैं। डा. सैफ ने बताया कि शाकाहारी डायनासोर के अंडे गोलाकार, जबकि मांसाहारी और दो पैरों पर चलने वाले डायनासोर के अंडे लंबे तथा अपरिमित आकृति के होते थे। शाकाहारी डायनासोर के अंडों के जीवाश्मों में सूक्ष्म छिद्र जैसी संरचना पाई जाती हैं, जबकि मांसाहारी डायनासोर के अंडे चिकनी सतह वाले होते हैं.यह खोज न सिर्फ जीवाश्म विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है, बल्कि शिवालिक की पहाड़ियों के भूवैज्ञानिक इतिहास पर भी प्रकाश डालती है। इससे पता चलता है कि शिवालिक की पहाड़ियां भी अरावली पर्वत श्रृंखला का अंतिम छोर है, जो कभी तटीय क्षेत्र हुआ करता था तथा डायनासोरों के लिए अनुकूल और समृद्ध प्राकृतिक आवास था।
0 2,500 1 minute read





