जिले में बैतूल- नागपुर फोरलेन पर दोनों ओर दर्जनों चिमनियां धुआं उगल रही हैं। वैसे तो नियमों के अनुसार इन चिमनियों की ऊंचाई 49 फीट होना चाहिए लेकिन केवल 9 से 10 फीट की ऊंचाई रखकर गुड़ा घाना संचालक वायु प्रदूषण फैला रहे हैं। अधिकांश गुड़ घानों का धुआं इतना काला और गाढ़ा है कि यह पूरे वातावरण प्रदूषित हो रहा है। वहीं गुड़ बनाते समय केमिकल भी मिलाया जा रहा है। इसकी तय मात्रा से ज्यादा मिलाने पर यह गुड़ मानव शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
औद्योगिक क्षेत्र से लेकर सांपना डेम तक नागपुर- बैतूल फोरलेन पर 11 किलोमीटर में पड़ताल की तो 10 गुड़ घानों की चिमनियां जहरीला धुआं उगलती मिलीं। कोसमी के आगे तीन गुड़ घाने मिले। इसी तरह तितली चौराहे से सांपना तक 7 गुड़ घाने इस तरह के मिले। पिछले साल 15 जगहों के सैंपल हुए थे, जिसमें प्रदूषित धुआं पाया गया था। इस साल अब तक विभाग ने सुध नहीं ली है। कई बार धुआं इतना गहरा और काला होता है कि दिखाई तक देना बंद हो जाता है। जो 15 सैंपल एक महीने पहले लिए गए थे उनकी रिपोर्ट आज तक नहीं आई है।
घानों की चिमनियों पर जांच के लिए नहीं लगाए उपकरण जिले में गुड़ घानों से निकलने वाले धुएं के प्रदूषण की जांच करने के लिए पिछले साल प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीमों ने उपकरणों को लगाकर जिले के गुड़ घानों के आसपास से सैंपलिंग की थी। लेकिन इस साल सैंपलिंग के लिए टीमें नहीं आई। इस कारण धुएं के सैंपल नहीं हुए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केमिस्ट और अन्य कर्मचारियों की टीम बैतूल आई थी, 15 जगहों पर इस टीम ने पीएम 10 और पीएम 2.5 उपकरण लगाए गए थे।
गुड़ घानों में उपकरण लगवाकर सैंपल लेंगे ^गुड़ घानों से जो धुआं निकलता है वह पर्यावरण के लिए ठीक है कि नहीं इसकी जांच करने हम जल्द टीमें भेजेंगे। इसकी पड़ताल करवाई जाएगी। उपकरण लगवाकर सैंपल लिए जाएंगे। इन सैंपलों की भोपाल में लैब में जांच करवाएंगे। – अरविंद तिवारी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
नियम के अनुसार गुड़ घानांे की चिमनी 49 फीट होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में 72 गुड़ घानों में 12 से 15 फीट ऊंची चिमनी बनाकर खानापूर्ति की जा रही। चिमनी की ऊंचाई कम होने से धुआं नीचे ही रह जाता है। जिससे लोग और वाहन चालक इसके संपर्क में आते हैं। धुआं पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है।





