छत्तीसगढ़

आधुनिक दौर में किसान ने जीवित रखी पुरानी परंपरा, मवेशियों के रखे नाम, पुराने जमाने की चीजों का करते हैं इस्तेमाल

धमतरी :धमतरी के गांवों में आज भी पुरातन सभ्यता और परंपरा का निर्वहन किया जाता है. भले ही आधुनिकता हर तरफ छाई हो, लेकिन अब भी कई गांव ऐसे हैं, जो आधुनिकता के दौर में भी अपनी पुरानी परंपरा को नहीं भूले हैं. आज कई लोग गांव की कई वस्तुओं के नाम नहीं जानते हैं. लेकिन धमतरी जिले के एक किसान ने अपने घर पर ही सभी वस्तुओं के नाम दीवार पर लिखवा रखे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी छत्तीसगढ़ की परंपरा और वस्तुओं को जान पहचान पाए.किसान थनेंद्र साहू ने अपने घर पर सभी चीजों के नाम दीवार पर लिखवा रखे हैं. यह एक छोटी लाइब्रेरी की तरह है.

घर पर पुरानी चीजों के दीवार पर लिखे नाम

धमतरी जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर हथबंद गांव है. यहां पर किसान थनेंद्र साहू पिछले 12 वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं.छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के किसान ने अपने घर पर सभी वस्तुओं के नाम पहचान लिखवा रखे हैं. इससे फायदा यह है कि जो भी उनके घर आता है, वह पढ़कर और देखकर पुरानी चीजों और गांव के रहन-सहन को बखूबी जान सकता है.

घर में पुरानी चीजों की जानकारी

घर पर प्रवेश करते ही सबसे पहले उनका एक रुम दिखता है,जिसमें कार्यालय लिखा गया है. रुम के बगल में जाता चक्कीरखी हुई है. घर पर ही गायों के रखने के लिए पशुशाला है, जिसे छत्तीसगढ़ी में गाय कोठाकहा जाता है, उसका भी परिचय लिखा गया है. गायों के नाम रखे गए हैं. जिस नाम से गायों को पुकारा जाता है, वह गाय दौड़ी चली आती है.पौराणिक मान्यताओं को आज भी घर पर निभाया जा रहा है. गायों के नाम रखे गए हैं जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गायों के नाम रखे थे. घर पर जो किसान आते हैं, वो ये सब देखते हैं.आने वाली पीढ़ी भी पुरानी चीजों को जान पहचाने, इसलिए ये सारे नाम लिखवा रखे हैं- थनेंद्र साहू, किसानपुराणों से मिली थनेंद्र को प्रेरणा

थनेंद्र साहू ने बताया कि हमारे घर में गाय और बैलों के नाम लिखे हुए हैं. पुराने जमाने में जब किसी पशु का जन्म होता था, उनका नाम रखा जाता था. इसलिए मैंने भी अपनी गाय और बैलों का नाम लिखा है. रामायण महाभारत में भी गाय के नामों का उल्लेख है.जैसे समुद्र मंथन में कामधेनु निकली थी और रामायण में नंदिनी का उल्लेख है.आज हर जगह आटा चक्की लग गए हैं.लेकिन मेरे घर में परंपरागत जाता है,जिसमें अनाज को दरा जाता है. यदि हम पुरानी चीजों का सही इस्तेमाल करें तो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है. इससे हमें किसी तरह की कोई बीमारी नहीं होती है.

औषधीय पौधे की भी लिखकर रखी जानकारी

वहीं थनेंद्र के भाई हरीश कुमार साहू ने बताया कि हमने जो भी औषधि वाले पौधे लगाए हैं,उनके नाम लिखे हैं.जैसे चिरायता है, उसे कालमेघ भी कहा जाता है. इसका इस्तेमाल करने से शुगर बीपी ठीक हो जाता है.शरीर में जो बुखार आता है, वो ठीक हो जाता है तो हमने इसे जानकारी के लिए लिखकर रखा है. हमारे बुजुर्ग हमको बताएं हैं कि इसका इस्तेमाल करने से सेहत और स्वास्थ्य ठीक रहता है.

हमारे यहां गाय का नाम लिखा गया है.सभी गायों का नाम लोग जानते हैं.परंपरागत जाता का इस्तेमाल आज भी होता है.साथ ही साथ औषधि पौधा भी हमारे यहां पर है.ये सभी चीजें विलुप्ति के कगार पर है. इसे बचाने के लिए हमने सभी के नाम लिखकर रखा है- हरीश कुमार साहू,थनेंद्र का भाई

गौमाता काफी गुणकारी होती है.हम उनका ख्याल रखते हैं.हम सभी गायों का नाम रखे हैं,उनको नाम से पुकारने पर वो आ जाती हैं. जाता भी है, जिसमें अनाज को दरते हैं. जो नाम लिखे हैं, उसे जानने के लिए लिखे हैं कि जो भी बाहर से आए तो उसका नाम जाने- अमरबती साहू, थनेंद्र की मां

थनेंद्र की इस छोटी लाइब्रेरी की चर्चा पूरे गांव में है.आसपास के लोग और दूसरे गांव से भी लोग थनेंद्र के घर पुरानी चीजों को जानने के लिए आते हैं.साथ ही साथ उनके घर पर रखे जाता का इस्तेमाल अनाज को दरने के लिए किया जाता है. जिला प्रशासन भी थनेंद्र साहू को कई मौकों पर सम्मानित कर चुका है.दूसरे किसानों को भी थनेंद्र से लेनी चाहिए प्रेरणा

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस किसान की सराहना करते हुए कहा कि वो जल्द थनेंद्र साहू के घर पर विजिट करेंगे. कलेक्टर ने कहा कि थनेंद्र साहू ऑर्गेनिक और पारंपरिक खेती में अच्छा काम कर रहे हैं. बाकी सभी किसानों को थनेंद्र से पारंपरिक खेती की प्रेरणा लेनी चाहिए.

राज्य अलंकरण का मिला सम्मान

2025 में थनेंद्र साहू को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा कृषक अलंकरण डॉ. खूबचंद बघेल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है. किसान ने जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए सैकड़ों प्रकार के धान उगाए हैं.जैविक खेती के लिए उन्हें कई बार पुरस्कार भी मिल चुका है. जैविक खेती और उनके बनाए जैविक खाद को जानने दूर-दूर से कृषि की पढ़ाई कर रहे छात्र और किसान उनके घर पहुंचते हैं.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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