पलामू. गन्ने के रस से तैयार होने वाला गुड़ और चीनी आज भले ही ज्यादातर फैक्ट्रियों में बनकर बाजार पहुंच रहा हो, लेकिन पलामू जिले के पांकी प्रखंड में आज भी पारंपरिक तरीके से गुड़ बनाने की परंपरा जीवित है. यहां के किसान बिना किसी केमिकल के नेचुरल और ऑर्गेनिक गुड़ तैयार कर रहे हैं, जिसकी मांग दूर-दराज के इलाकों तक बनी हुई है.
स्वाद और औषधीय गुणों में खास
इन दिनों जिले में गन्ने की कटाई जोरों पर है. खेतों से कटे गन्ने सीधे चरकी तक पहुंच रहे हैं, जहां से रस निकालकर गुड़ तैयार किया जा रहा है. परंपरागत तरीके से गुड़ बनाना आसान नहीं है. इसमें मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन इसका स्वाद और औषधीय गुण इसे खास बना देते हैं.3 घंटे तक धीमी आंच पर पककर बनता है 20 किलो गुड़
पांकी प्रखंड का सगालिम गांव गन्ने की खेती और देसी गुड़ के लिए खास पहचान रखता है. गांव के किसान दिलीप कुमार पासवान पिछले 10 वर्षों से गन्ने की खेती और गुड़ निर्माण कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि गुड़ तैयार होने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है. एक बार में करीब 22 किलो गुड़ तैयार किया जाता है, जिसे कढ़ाही में चूल्हे पर लगभग तीन घंटे तक धीमी आंच में पकाया जाता है. बाजार में यह गुड़ 80 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है और इसकी मांग स्थानीय बाजार के अलावा दूर-दूर तक रहती है.
ऐसे होती है शुरुआत
गन्ने से पारंपरिक गुड़ बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत गन्ने का रस निकालने से होती है. इसके लिए आजकल डीजल या इलेक्ट्रिक मोटर से चलने वाली चरकी का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि पुराने समय में यही काम बैलों से चलने वाले कोल्हू से किया जाता था. रस निकालने के बाद उसे मलमल के कपड़े से छाना जाता है, ताकि गंदगी अलग हो जाए.
इसके बाद साफ रस को आग की भट्ठी पर रखी कढ़ाही में डाला जाता है. ईंधन के रूप में गन्ने के सूखे भूसे का इस्तेमाल किया जाता है. रस को तीन से चार घंटे तक मध्यम आंच पर लगातार उबाला जाता है. इस दौरान रस का रंग धीरे-धीरे बदलने लगता है और वह गाढ़ा होने लगता है.
ठंडा होने पर दिया जाता है आकार
जब रस पर्याप्त गाढ़ा हो जाता है, तो उसे चौड़ी ट्रे में डालकर ठंडा किया जाता है. ठंडा होने के दौरान उसे लगातार खुर्चने या करछी से चलाया जाता है, जिससे गुड़ की सही बनावट बने. इसके बाद गुड़ को गोल-गोल आकार देकर तैयार कर लिया जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में गुड़ का सेवन शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करता है. जहां चीनी सिर्फ मिठास देती है, वहीं गुड़ स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि पांकी के किसानों द्वारा तैयार किया गया यह देसी गुड़ आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.





