सियाचिन ग्लेशियर… जहां हाड़ कंपा देने वाली हाड़-तोड़ ठंड और पल-पल में सांसें थाम देने वाली बर्फीली हवाओं का राज रहता है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर बसे इस सफेद रेगिस्तान में टिक पाना अच्छे-अच्छे सूरमाओं के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होती है। लेकिन राजस्थान के उदयपुर की एक बेटी ने इसी बर्फ के पहाड़ पर शौर्य का वो नया इतिहास लिखा, जिसने पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। हम बात कर रहे हैं कैप्टन शिवा चौहान की। शिवा ने साल 2023 में दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र, यानी सियाचिन ग्लेशियर पर पहली बार ऑपरेशनल तौर पर तैनात होने वाली महिला सैन्य अधिकारी बनकर दुनिया को अपनी ताकत का लोहा मनवाया। मगर इस बेमिसाल कामयाबी की नींव किसी मखमली रास्ते पर नहीं, बल्कि बेहद कठिन संघर्षों, आंसुओं और कभी न टूटने वाले हौसले के बीच रखी गई थी।
वो मुश्किल घड़ी जिसने बदल दी जिंदगी
कैप्टन शिवा चौहान की यह कहानी सिर्फ एक फौजी की वर्दी पहनने की दास्तां नहीं है। यह कहानी है उस अदम्य इच्छाशक्ति की जो मुश्किलों के आगे कभी झुकना नहीं सीखती। शिवा जब सिर्फ 11 साल की थीं, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया। किसी भी बच्चे के लिए इतनी कम उम्र में पिता को खोना जिंदगी की सबसे दुखद घटना होती है। घर में सन्नाटा था और भविष्य को लेकर ढेरों सवाल। ऐसी कठिन घड़ी में शिवा की मां ने परिवार की कमान संभाली। तमाम आर्थिक तंगियों और मानसिक तनाव के बीच भी उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की पढ़ाई रुकने नहीं दी। शिवा की बड़ी बहन हमेशा उनके लिए प्रेरणा बनी रहीं। जब भी शिवा का हौसला डगमगाता, बहन उन्हें आगे बढ़ने के लिए हिम्मत देती थीं। पैसे की कमी हमेशा आड़े आती रही, लेकिन शिवा की आंखों में जो सपना पल रहा था, वह इस तंगी से कहीं ज्यादा बड़ा और मजबूत था। उनका सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि भारतीय सेना की वर्दी पहनना।
साइकिल से नाप दिया पहाड़ों का कठिन सफर
सियाचिन जैसे खतरनाक और जानलेवा ग्लेशियर पर तैनाती पाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। इसके लिए शिवा को खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर लोहे की तरह मजबूत साबित करना था। जुलाई 2022 में कारगिल विजय दिवस के मौके पर शिवा ने सुरा सोई साइकिलिंग अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने अपनी टीम के साथ सियाचिन वॉर मेमोरियल से लेकर कारगिल वॉर मेमोरियल तक का सफर तय किया। लगभग 508 किलोमीटर की यह बेहद दुर्गम दूरी उन्होंने सिर्फ 11 दिनों में साइकिल चलाते हुए पूरी की। शिवा के इसी असाधारण जज्बे और लीडरशिप क्वालिटी को देखकर सेना ने उन्हें सियाचिन ग्लेशियर की सबसे कठिन पोस्टिंग के लिए शॉर्टलिस्ट किया। लेकिन वहां जाने से पहले उन्हें सियाचिन बैटल स्कूल में एक महीने की हाड़ कंपा देने वाली और थका देने वाली सख्त ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पार कर लिया।
जनवरी 2023 में पहली महिला ऑपरेशनल तैनाती
जनवरी 2023 में वो ऐतिहासिक पल आया जब कैप्टन शिवा चौहान को सियाचिन ग्लेशियर पर लगभग 15,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित ‘कुमार पोस्ट’ पर तैनात किया गया। इसके साथ ही वह इस सबसे दुर्गम मोर्चे पर कमान संभालने वाली देश की पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गईं। वहां एक इंजीनियर अधिकारी के तौर पर उनकी जिम्मेदारियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं। शून्य से भी 40-50 डिग्री नीचे के जानलेवा तापमान में शिवा ने अपनी टीम के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण काम किए जिसमें सेना के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करना, बर्फीले तूफानों के बीच मिलिट्री हेलिपैड को हर वक्त चालू रखना, बेहद कठिन रास्तों पर सेना की रसद और लॉजिस्टिक्स को समय पर पहुंचाना और बर्फीली परिस्थितियों में अपने साथी जवानों का हौसला बनाए रखना शामिल है।





