दिसंबर के बीच आते-आते देश के मौसम में तेज बदलाव देखने को मिल रहा है। ठंड अब केवल पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदानी राज्यों में भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 से 72 घंटों के लिए जो चेतावनी जारी की है, वह आम लोगों के साथ-साथ किसानों, यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है। कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है, तो कहीं बर्फीली हवाओं के कारण तापमान में तेज गिरावट हो सकती है। ऐसे हालात में सतर्क रहना और मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखना जरूरी हो गया है।
उत्तर भारत में शीतलहर और घने कोहरे का खतरा
IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर भारत के कई राज्यों में ठंड और तेज होने वाली है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में अगले कुछ दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है। पहाड़ों से आ रही ठंडी और बर्फीली हवाएं ठिठुरन बढ़ा देंगी, जिससे सुबह और देर रात के समय ठंड ज्यादा महसूस होगी।
कोहरे से प्रभावित होगा यातायात
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में घना कोहरा छाने की संभावना है। विजिबिलिटी कम होने से सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है। खासकर सुबह के समय हाईवे पर वाहन चलाने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ट्रेनों और फ्लाइट्स के लेट होने की भी आशंका जताई जा रही है।
किसानों के लिए चेतावनी
ग्रामीण इलाकों में शीतलहर का असर ज्यादा गहरा हो सकता है। खुले खेतों और नमी के कारण ठंड तेजी से बढ़ती है। IMD के अनुसार उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पाला पड़ने की स्थिति बन सकती है, जिससे सरसों, आलू और सब्जियों जैसी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को फसलों को ढकने और सिंचाई जैसे सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और पश्चिमी विक्षोभ का असर
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मौसम और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में असर दिखाने वाला है। ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी होने की संभावना है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश देखी जा सकती है।
जनजीवन पर पड़ सकता है असर
कश्मीर घाटी में पहले से ही तापमान शून्य से नीचे बना हुआ है। नई बर्फबारी के बाद ठंड और बढ़ने की आशंका है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। कई पहाड़ी मार्गों पर फिसलन बढ़ सकती है और कुछ रास्तों के अस्थायी रूप से बंद होने की स्थिति भी बन सकती है।
यात्रियों के लिए सावधानी जरूरी
जो लोग पहाड़ी इलाकों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, उन्हें मौसम को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। भूस्खलन, बर्फ जमने और सड़कों के बंद होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। प्रशासन ने भी अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
दक्षिण भारत में बारिश और बदला हुआ मौसम
जहां उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, वहीं दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज अलग बना हुआ है। IMD के मुताबिक तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। उत्तर-पूर्व मानसून भले ही कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन वातावरण में नमी बनी हुई है, जिससे बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश देखने को मिल सकती है।
अंडमान-निकोबार में भारी बारिश का अलर्ट
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय यातायात प्रभावित होने की संभावना है। कर्नाटक और तेलंगाना में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है, लेकिन रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है।
दिल्ली-NCR में ठंड, कोहरा और प्रदूषण की दोहरी चुनौती
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में ठंड के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी बड़ी समस्या बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार सुबह और रात के समय हल्का से मध्यम कोहरा छा सकता है। न्यूनतम तापमान 8 से 9 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जबकि दिन में अधिकतम तापमान 23 से 24 डिग्री तक पहुंच सकता है। ठंडी हवाओं के कारण ठंड का असर ज्यादा महसूस हो सकता है।
दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स कई इलाकों में ‘खराब’ श्रेणी में बना हुआ है। ठंड और कोहरे की वजह से प्रदूषक कण हवा में लंबे समय तक टिके रहते हैं, जिससे सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सावधानी और तैयारी ही है सबसे बेहतर उपाय
बदलते मौसम को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि लोग गर्म कपड़े पहनें, सुबह-शाम अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर जांच लें। किसानों को फसलों की सुरक्षा पर ध्यान देने और यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है।
डिस्क्लेमर: यह लेख भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों और सामान्य जानकारी पर आधारित है। मौसम की स्थिति समय और स्थान के अनुसार बदल सकती है। किसी भी यात्रा, कृषि कार्य या दैनिक गतिविधि से पहले IMD की आधिकारिक जानकारी और स्थानीय प्रशासन के निर्देश अवश्य जांचें।





