विजय ने कहा कि दुनिया भर में कही भी रहने वाले ईलम तमिल अपने नेता को खोकर दुखी है। वह भी ऐसा नेता जिसने उन्हें मां के समान प्यार दिया हो। हमें उनकी आवाज को उठाना होगा।अभिनेता से नेता बने एक्टर विजय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मास्टरमाइंड प्रभाकरण की तारीफ कर विवाद खड़ा कर दिया है। देश में रहने वाले श्रीलंकाई तमिलों की आवाज उठाने को आवश्यकता पर जोर देते हुए विजय ने कहा कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के पूर्व प्रमुख प्रभाकरण की तारीफ करते हुए उन्हें ईलम तमिलों के लिए मां समान बताया है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, जिस दौरान विजय यह भाषण दे रहे थे, जनता में लोग प्रभाकरण की तस्वीर लेकर भी खड़े हुए नागपट्टिनम में तमिझागा वेत्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख विजय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीलंकाई तमिलों के लिए प्रभाकरण एक मां के समान है। स्पष्ट रूप से प्रभाकरण की बात करते हुए विजय ने कहा, “हमारे नाभि-संबंधी रिश्तेदार, ईलम तमिल… चाहे वह श्रीलंका में हों या फिर दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद हों… वह अपने एक ऐसे नेता को खोने के बाद दुखी हैं, जिसने उन्हें मां जैसा प्यार दिया है। आज उनकी आवाज को उठाना हमारा कर्तव्य है।”
हालांकि यह पहली बार नहीं है कि विजय ने श्रीलंकाई तमिलों के लिए विजय ने अपना समर्थन व्यक्त किया है। इसके पहले भी वह 2008 में श्रीलंका में तमिल समुदाय के लोगों की हत्या के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। उनकी तरफ से कहा गया था कि हम श्रीलंकाई तमिलों का समर्थन करते हैं, लेकिन यह भारत में प्रतिबंधित लिट्टे को समर्थन देने जैसा नहीं है।
आपको बता दें श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल राज्य को लेकर युद्ध लड़ने वाले लिट्टे चीफ प्रभाकरण और उसके खुफिया प्रमुख पोट्टू अम्मान ने 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची थी। जानकारी के मुताबिक लिट्टे भारत के प्रधानमंत्री से 1987 में पीस कीपिंग फोर्स भेजने का बदला लेना चाहता था। गौरतलब है कि चेन्नई के पास एक जगह पर रैली में भाग लेने के लिए आए राजीव गांधी की एक तमिल महिला सुसाइड बॉम्बर ने हत्या कर दी थी। इस हत्या के बाद भारत सरकार न लिट्टे को यहां से प्रतिबंधित कर दिया और प्रभाकरण और पोट्टू को अपराधी घोषित कर दिया। हालांकि लिट्टे ने कभी भी आधिकारिक तौर पर राजीव गांधी की हत्या के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। भारत में प्रतिबंधित होने के बाद से प्रभाकरण का आंदोलन कमजोर पड़ना शुरू हो गया और 2009 में वह श्रीलंकाई सेना के हाथों मारा गया।
प्रभाकरण की प्रशंसा करने के अलावा विजय ने मछुआरों की समस्या पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हम डीएमके सरकार की तरह नहीं हैं जो मछुआरों के मुद्दे पर एक लंबा पत्र लिखकर चुप रहती है। मछुआरों की समस्या का समाधान ढूँढना हमारे प्रमुख एजेंडे में से एक है। मछुआरों का जीवन हमारे लिए महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ ही ईलम तमिलों के सपने भी हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।”गौरतलब है कि अभिनेता से नेता बने विजय तमिलनाडु में राजनैतिक जमीन की तलाश कर रहे हैं। इसके लिए वह लगातार सत्ताधारी डीएमके और विपक्षी पार्टी एआईडीएमके पर निशाना साधते रहते हैं। विजय ने 2024 में स्थापित अपनी पार्टी के साथ आने वाले विधानसभा चुनाव में लड़ते हुए नजर आएंगे।





