छत्तीसगढ़

जैविक अपशिष्ट से जैविक खाद का उत्पादन ग्रामीण युवाओं के लिए आय एवं उद्यमिता का सशक्त माध्यम– डॉ. राजीव श्रीवास्तव*

*केवीके कवर्धा में वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन प्रशिक्षण का शुभारंभ, वनांचल के 30 युवा कृषक सीखेंगे स्वरोजगार की तकनीक*

*जैविक अपशिष्ट से जैविक खाद का उत्पादन ग्रामीण युवाओं के लिए आय एवं उद्यमिता का सशक्त माध्यम– डॉ. राजीव श्रीवास्तव*

कवर्धा, अक्टूबर 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा द्वारा ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित आजीविका से जोड़ने एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरल योजनांतर्गत वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 से 17 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर डॉ. एस. एस. टुटेजा एवं निदेशक, अटारी, जबलपुर डॉ. एस. आर. के. सिंह के मार्गदर्शन तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के प्रमुख डॉ. बी. पी. त्रिपाठी के नेतृत्व में किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजीव श्रीवास्तव, अधिष्ठाता, संत कबीर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कवर्धा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. बी. पी. त्रिपाठी ने अतिथि एवं प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण के उद्देश्यों तथा ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन जैविक अपशिष्टों के सदुपयोग, मृदा स्वास्थ्य में सुधार तथा कृषि उत्पादन की लागत कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्रामीण युवा इस तकनीक को अपनाकर कम लागत में स्वरोजगार प्रारंभ कर सकते हैं तथा वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन एवं विपणन के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से प्राप्त तकनीकी ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करते हुए इसे आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक, उपयुक्त केंचुआ प्रजातियों का चयन, वर्मी बेड की स्थापना, जैविक अपशिष्टों का प्रबंधन, नमी एवं तापमान का रखरखाव, तैयार खाद की गुणवत्ता, वर्मीवास का उपयोग तथा वर्मी कम्पोस्ट के भंडारण एवं विपणन संबंधी विषयों पर तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है। प्रशिक्षणार्थियों को वर्मीकम्पोस्ट इकाई की स्थापना, उत्पादन प्रक्रिया तथा इसे लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करने के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के वनांचल क्षेत्र बोदलपानी एवं जमुनपानी के 30 युवा कृषक सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से इन युवाओं को जैविक संसाधनों के बेहतर उपयोग, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. बी. एस. परिहार, डॉ. टी. एस. सोनवानी एवं डॉ. एन. सी. बंजारा तथा कार्यक्रम सहायक श्री योगेश कुमार कौशिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन एवं समन्वय केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. सी. पी. राहंगडाले द्वारा किया जा रहा है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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