छत्तीसगढ़

सेवा की कहानी जिसमे लखपति दीदी चुन्नी कुम्भकार बनी सभी के लिए प्रेरणा*

*सेवा की कहानी जिसमे लखपति दीदी चुन्नी कुम्भकार बनी सभी के लिए प्रेरणा*

*मिट्टी को आकार देकर संवारा अपना भविष्य*

*बिहान योजना से खुला सफलता के द्वारा*

कवर्धा, अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना अंतर्गत मिट्टी शिल्प के व्यवसाय से जुड़कर लखपति दीदी चुन्नी कुम्भकार सभी के प्रेरणा का स्रोत बन गई है। क्योंकि कभी सुविधाओं से वंचित एवं अभावग्रस्त समय के कारण इच्छाएं पूरी नहीं हो पाती थी। आर्थिक परेशानियां जीवन की प्रगति को बाधित कर रहे थे। पैसे की आवक कम होने से व्यवसाय बढ़ाना संभव नहीं था। ऐसे ही जरूरतमंद ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्न बनाना ही सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य रहा है। सेवा की ये कहानी है कबीरधाम जिले के विकासखंड बोड़ला अंतर्गत वनांचल ग्राम रेंगाखारकला के गौरी महिला स्व सहायता समूह की। जिससे जुड़कर श्रीमती चुन्नी कुम्भकार लखपति दीदी के रूप में आज जानी और पहचानी जा रही है।

लखपति दीदी चुन्नी कुम्भकार बिहान योजना में जुड़ने से पहले अपने परिवारिक पेश मिटटी के बर्तन बनाने का काम करती थी। तब उन्हें ज्यादा आमदनी नहीं होता था जो पूरे परिवार की जरूरत को पूरा कर सके। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें योजना अंतर्गत वित्तीय सहायता मिली और व्यवसाय को आगे बढ़ने का सुनहरा मौका मिल गया। बर्तन बनाने में सहयोग के साथ-साथ तकनीकी मार्गदर्शन मिला जिससे व्यवसाय को आगे बढ़ने लगा। मिटटी के बर्तन, मटका, दीया, मुर्ति इत्यादि बनाकर स्थानीय बाजारों में विक्रय करने से अच्छी आमदनी होने लगी है। चुन्नी कुम्भकार की आमदनी पहले से अधिक बढ़ गई है और स्थानी बाजारों के साथ-साथ जिला एवं राज्य स्तरीय उत्सव कार्यक्रम, विभिन्न महोत्सव,क्षेत्रीय सरस मेला एवं राज्य स्तरीय सरस मेला में उनके द्वारा अपनी मिट्टी शिल्प कला की मार्केटिंग की जा रही है जिससे और अधिक लाभ प्राप्त होता है।

*व्यवसाय से मिली तरक्की ने बदला मेरा जीवन-चुन्नी कुम्भकार*

लखपति दीदी चुन्नी कुम्भकार बताती है कि बिहान योजना में जोड़ने से पहले आर्थिक एवं सामाजिक स्तर कमजोर था। पैसे की आवक कम थी तो जीवन यापन में लगी रहती थी। लेकिन समूह से जुड़कर जीवन में बहुत सुधार हुआ है। बिहान योजना से जुड़कर व्यवसाय को खड़ा करने के लिए लोन प्राप्त हुआ। इन पैसों की सहायता से समूह के सभी सदस्यों ने मिलकर बड़ी मात्रा में भगवान की मूर्तियां, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया। मिट्टी को आकार देते-देते मेरा जीवन भी सवरने लगा और देखते ही देखते 1 लाख 80 हजार रुपए का व्यवसाय विभिन्न माध्यमों से हो गया। इस व्यवसाय से 1 लाख 20 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी हुई। व्यवसाय की सहायता से मैं अपने परिवार के भरण पोषण के साथ-साथ अपने बच्चों की शिक्षा,स्वास्थ्य एवं अन्य दैनिक जरूरी आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में सक्षम हो गई हूं। अब मुझे लखपति दीदी का दर्जा मिलने से समाज में मान-सम्मान बढ़ गया और आर्थिक तरक्की ने जीवन को सुखमय बना दिया है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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