बीजापुर। बस्तर के घने जंगलों में शिकारियों द्वारा वन्यजीवों को फंसाने के लिए बिछाए जाने वाले फंदों को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार एक प्रशिक्षित स्निफर डॉग तैनात किया गया है। वन विभाग ने इस डॉग स्क्वॉड की सहायता से एंटी-स्नेर वॉक और मॉक ड्रिल शुरू कर दी है। यह स्निफर डॉग न केवल छिपाए गए फंदों की खोज करता है, बल्कि गंध के सहारे संभावित संदिग्ध शिकारियों के ठिकानों तक पहुंचने का अभ्यास भी कर रहा है। वन अमला गश्त को मजबूत बनाने के लिए तकनीक और डॉग स्क्वॉड के बीच समन्वय स्थापित कर रहा है।
वन अमला जंगल में एक निश्चित स्थान पर फंदा छिपाकर रखता है। इसके बाद स्निफर डॉग को फंदे की गंध सूंघाकर सुराग का पीछा करने के लिए छोड़ा जाता है। डॉग स्क्वॉड का दस्ता गंध के आधार पर आगे बढ़ते हुए संभावित संदिग्ध के स्थान तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को दोहराता है। इस तरह के नियमित अभ्यास से वन कर्मियों और डॉग स्क्वॉड के बीच तालमेल बेहतर हो रहा है।
वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता
विशाल वन क्षेत्र, घनी झाडिय़ों और दुर्गम परिस्थितियों के कारण सामान्य पैदल गश्त के दौरान हर एक फंदे को खोज पाना बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। शिकारी अक्सर फंदा लगाने के बाद तुरंत उस स्थान से चले जाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित डॉग की सूंघने और पीछा करने की क्षमता वन अमले के काम को आसान बना रही है। ये फंदे बाघ, तेंदुए, हिरण और जंगली सूअर सहित कई अन्य वन्यजीवों की जान के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न करते हैं। फंदे में फंसकर बेजुबान जीव गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है।
पंचकूला से मिला विशेष प्रशिक्षण
इस अभियान में शामिल स्निफर डॉग हरियाणा के पंचकूला स्थित डॉग प्रशिक्षण केंद्र से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर इंद्रावती टाइगर रिजर्व पहुंचा है। डॉग के साथ उसके हैंडलर को भी गहन प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान डॉग को फंदे की गंध पहचानने और उसके आधार पर सुराग जुटाने में पारंगत किया गया है। वहीं, हैंडलर को डॉग के शारीरिक संकेतों को समझने और वन कर्मियों के साथ मिलकर संयुक्त तलाशी अभियान चलाने की कला सिखाई गई है।
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