देश दुनिया

ईंट नहीं, ‘अंडे के छिलकों’ से बनी ईंटों से बनेंगे घर, मार्केट में आई कमाल की टेक्नोलॉजी

भीषण गर्मी के दौरान घरों को ठंडा रखना आसान नहीं होता। तेज धूप में दीवारें गर्म हो जाती हैं और यह गर्मी धीरे-धीरे घर के अंदर पहुंचने लगती है। ऐसे में लोग AC और कूलर का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे बिजली की खपत भी बढ़ जाती है। लेकिन क्या घर बनाने में इस्तेमाल होने वाली ईंटें ही गर्मी को कम सोखने लगें तो?

मिस्र के शोधकर्ताओं ने इसी दिशा में एक दिलचस्प तकनीक पर काम किया है। उन्होंने अंडों के फेंके जाने वाले छिलकों का इस्तेमाल कर ऐसी खास ईंटें तैयार की हैं, जो    की तुलना में कम गर्मी सोख सकती हैं। रिसर्च में सामने आया कि सही मात्रा में अंडे के छिलकों का पाउडर मिलाने से ईंट की बनावट बदल जाती है और उसकी गर्मी सोखने की क्षमता कम हो सकती है।

यह तकनीक केवल घरों को ठंडा रखने में ही मददगार नहीं हो सकती, बल्कि बड़ी मात्रा में फेंके जाने वाले अंडे के छिलकों को दोबारा इस्तेमाल करने का रास्ता भी दिखाती है।

शोधकर्ताओं ने अंडे के छिलके के पाउडर को अलग-अलग अनुपात में मिलाकर ईंटों का परीक्षण किया। रिसर्च में पाया गया कि जिन ईंटों में लगभग 10% अंडे के छिलके का पाउडर इस्तेमाल किया गया, उन्होंने बेहतर परिणाम दिए। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकार की ईंटें सामान्य ईंटों की तुलना में लगभग 50% तक कम गर्मी सोख सकती हैं। यानी तेज गर्मी के दौरान इन ईंटों की सतह सामान्य ईंट की तुलना में कम गर्म हो सकती है।

इसका एक प्रमुख कारण ईंट के अंदर बने सूक्ष्म छिद्र माने जा रहे हैं। इन छोटे खाली स्थानों की वजह से गर्मी का ट्रांसफर प्रभावित हो सकता है और ईंट में गर्मी जमा होने की क्षमता कम हो सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसी ईंटें AC का पूरी तरह विकल्प बन जाएंगी। घर का तापमान केवल ईंटों से तय नहीं होता। छत, खिड़कियां, वेंटिलेशन, इंसुलेशन और स्थानीय मौसम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

जैसी तकनीक खासकर उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां लंबे समय तक तेज गर्मी पड़ती है। सामान्य ईंटें धूप और गर्म हवा के संपर्क में आकर काफी गर्म हो जाती हैं। इसके बाद दीवारों में जमा गर्मी घर के अंदर भी पहुंच सकती है।

अगर   कम गर्मी सोखे, तो घर के अंदर आने वाली गर्मी को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। इससे AC या कूलिंग सिस्टम पर निर्भरता घटने की संभावना हो सकती है और बिजली की खपत भी कम हो सकती है।

दूसरा बड़ा फायदा पर्यावरण से जुड़ा है। दुनिया भर में बड़ी संख्या में अंडों के छिलके खाद्य कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं। यदि इस तरह के कचरे को निर्माण सामग्री में इस्तेमाल किया जाए, तो इसे एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।

यह तकनीक अभी रिसर्च और विकास के चरण से जुड़ी हुई है। किसी भी नई  को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने से पहले उसकी मजबूती, टिकाऊपन, लागत, पानी से सुरक्षा और लंबे समय तक प्रदर्शन जैसे कई पहलुओं की जांच जरूरी होती है। इसके बावजूद यह रिसर्च   के लिए एक दिलचस्प दिशा दिखाती है। भविष्य में ऐसी नई सामग्री विकसित की जा सकती है, जो निर्माण कचरे या घरेलू कचरे का उपयोग करके घरों को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाए।

अंडे के छिलकों से बनी ये ईंटें इस बात का अच्छा उदाहरण हैं कि जिस चीज को हम आमतौर पर बेकार समझकर फेंक देते हैं, वह सही तकनीक और रिसर्च के जरिए उपयोगी संसाधन बन सकती है। अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह तकनीक गर्म इलाकों में घरों की डिजाइन और निर्माण के तरीके को बदलने में मदद कर सकती है।

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button