*निकासी द्वार से प्रवेश कर रहे श्रद्धालुओं को ही रोका गया, निकासी से प्रवेश करने पर मंदिर के अंदर पहले से मौजूद श्रद्धालुओं के लिए हो सकता था खतरा*
*सुरक्षा के मद्देनजर कांवड़ियों को निर्धारित प्रवेश द्वार से आने की गई अपील*
*श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, भोरमदेव मंदिर में प्रवेश के लिए दो द्वार और निकास के लिए एक द्वार है निर्धारित*
कवर्धा, अगस्त 2026/ भोरमदेव मंदिर में कुछ कांवड़ियों को प्रवेश से रोके जाने के संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (रा.) बोड़ला श्री आशुतोष शर्मा और एसडीओपी बोड़ला श्री अखिलेश कौशिक ने बताया कि सोमवार 17 अगस्त 2026 की सुबह करीब 6 बजे मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में कांवड़िए एवं श्रद्धालु मौजूद थे। कुछ कांवड़ियों द्वारा निकास द्वार से मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास किया जा रहा था। उस समय मंदिर के गर्भगृह एवं मंडप में पहले से ही करीब 60 से 70 श्रद्धालु मौजूद थे, जिनमें अधिकांश कांवड़िए ही थे। ऐसे में निकास द्वार से एक साथ प्रवेश होने पर भीड़ बढ़ने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका थी। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन एवं पुलिस कर्मचारियों ने निकास द्वार से प्रवेश कर रहे कांवड़ियों को रोका और उन्हें निर्धारित प्रवेश द्वार से आने के लिए समझाइश दी। उन्होंने आगे बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भोरमदेव मंदिर में तीन द्वार निर्धारित किए गए हैं। पूर्व एवं उत्तर दिशा के द्वार प्रवेश के लिए तथा दक्षिण दिशा के द्वार को निकास के लिए निर्धारित किया गया है।
*कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता*
एसडीएम ने कहा कि मंदिर प्रबंधन और प्रशासन सभी कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं का पूरा सम्मान करता है और उनका स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुगम दर्शन प्रशासन की प्राथमिकता है। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
प्रशासन ने सभी आगंतुकों एवं भक्तजनों से अपील की है कि मंदिर प्रबंधन द्वारा निर्धारित प्रवेश एवं निकास व्यवस्था का पालन करें तथा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग प्रदान करें, ताकि सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम दर्शन का लाभ मिल सके।





