सोचिए, अगर कोई आपसे कहे कि 5.5 मीटर लंबी सिल्क साड़ी को अलमारी या बड़े सूटकेस में नहीं, बल्कि एक नन्हीं सी माचिस की डिब्बी में बड़े आराम से रखा जा सकता है… तो क्या आप यकीन करेंगे? पहली नज़र में यह किसी जादू की छड़ी का कमाल या कोई ‘कैमरा ट्रिक’ लग सकता है. लेकिन यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प और बुनकरी कला का वो बेजोड़ मिसाल है, जिसे देखकर पूरी दुनिया हैरान रह गई है. आइए, जानते हैं इस अनोखी साड़ी और इसे बनाने वाले जादुई हाथों की पूरी दिलचस्प कहानीयह अद्भुत कारनामा तेलंगाना के राजन्ना सिरसिल्ला जिले के रहने वाले प्रसिद्ध बुनकर नल्ला विजय कुमार ने कर दिखाया है. विजय कुमार को उनकी उत्कृष्ट बुनाई के लिए ‘चेनेथा कला रत्न’ (Kalaratna) पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है.उनकी बनाई इस अनोखी साड़ी की लंबाई पूरे 5.5 मीटर और चौड़ाई 48 इंच है. आमतौर पर इतनी लंबी और चौड़ी साड़ी काफी जगह घेरती है, लेकिन विजय कुमार ने इसे धागों की ऐसी बारीकी से बुना है कि पूरी की पूरी साड़ी आसानी से मुड़कर एक माचिस की छोटी सी डिब्बी में समा जाती है.आखिर कैसे संभव हुई यह अजूबा
माचिस की डिब्बी में फिट होने वाली इस ‘मैजिक साड़ी’ के पीछे की इंजीनियरिंग और कारीगरी वाकई हैरान कर देने वाली है: 5.5 मीटर लंबी सिल्क साड़ी होने के बावजूद इसका कुल वजन मात्र 200 ग्राम है. बता दें कि यह पारंपरिक इकत (Ikkat) डिजाइन की साड़ी है, हाथकरघे (Handloom) से बुना गया है. इसमें इस्तेमाल किया गया सिल्क थ्रेड इतना लचीला और बारीक है कि कपड़ा बिना किसी सलवट या नुकसान के बहुत छोटा मुड़ जाता है.
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