चित्तौड़गढ़: द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की मित्रता और समर्पण की कहानी आज भी श्रद्धा के साथ सुनाई जाती है. लेकिन कलयुग में राजस्थान से आस्था, त्याग और समर्पण की ऐसी ही एक अनोखी मिसाल सामने आई है. डूंगरपुर जिले के एक साधारण किसान ने अपनी जीवनभर की कमाई और करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति भगवान सांवलिया सेठ के चरणों में समर्पित कर दी. खास बात यह है कि इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्हें पूरे 10 साल तक संघर्ष करना पड़ा और मंदिर व प्रशासनिक कार्यालयों के 100 से अधिक चक्कर लगाने पड़े. डूंगरपुर जिले की आसपुर तहसील के खेड़ा सामोर गांव निवासी अमरजी गौतम पाटीदार साधारण जीवन जीते हैं.धोती-कुर्ता पहनने वाले अमरजी के माता-पिता का निधन हो चुका है और वे अकेले रहते हैं. वर्ष 2016 में उन्होंने संकल्प लिया था कि अपनी पूरी जमीन और मकान भगवान सांवलिया सेठ को दान करेंगे. उनकी इस संपत्ति का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 10 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. हालांकि, यह फैसला जितना बड़ा था, उसे पूरा करना उतना ही कठिन साबित हुआ. जमीन पर ऋण होने, अलग-अलग खातों में दर्ज भूमि और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण दान की प्रक्रिया वर्षों तक अटकी रही. इस दौरान कई जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और श्री सांवलिया मंदिर मंडल के अध्यक्ष बदल गए, लेकिन अमरजी का संकल्प नहीं बदला. उन्होंने पिछले 10 वर्षों में सांवलियाजी और के 100 से अधिक चक्कर लगाए.आखिरकार मंदिर प्रशासन, स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों के सहयोग से उनकी 10.15 बीघा जमीन की रजिस्ट्री भगवान सांवलिया सेठ के नाम कर दी गई. इस तरह उनका वर्षों पुराना संकल्प पूरा हो सका. अमरजी की इस निष्काम भक्ति में गांव और आसपास के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया. जमीन का कर्ज चुकाने और अलग-अलग खातों को एक करने की प्रक्रिया में कई लोगों ने आर्थिक सहायता दी. पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी गिरिजा मैडम, भरत रावल, केवलजी और यहां तक कि कुवैत में रहने वाले देवीलाल ने भी सहयोग राशि भेजी. वहीं अधिवक्ता वालजी पाटीदार ने बिना कोई शुल्क लिए रजिस्ट्री से जुड़ी पूरी कानूनी प्रक्रिया नि:शुल्क पूरी कराई.
दान की गई भूमि पर भव्य गोशाला बनवाने की है इच्छा
अमरजी पाटीदार केवल संपत्ति दान कर ही नहीं रुके हैं. उनके खेत में लगे करीब 30 आम के पेड़ों के फल भी वे कभी बेचते नहीं हैं. उनकी इच्छा है कि दान की गई इस भूमि पर भविष्य में एक भव्य गोशाला का निर्माण हो, ताकि यह समाज और गौसेवा के काम आ सके. इतना ही नहीं, जमीन की रजिस्ट्री पूरी होने के बाद अब वे अपनी माता के एक किलो चांदी के आभूषण भी भगवान सांवलिया सेठ को अर्पित करने की तैयारी कर रहे हैं.
अमरजी पाटीदार की निष्ठा आस्था और समर्पण की अनुठी मिशाल बनी
श्री सांवलिया मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र सिंह ने भी इस दान को आस्था और समर्पण की अनूठी मिसाल बताया. उनका कहना है कि अमरजी पाटीदार का योगदान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणादायक है. अमरजी गौतम पाटीदार की यह कहानी बताती है कि जब आस्था सच्ची हो और संकल्प अटल हो, तो वर्षों की कठिनाइयां भी इंसान को अपने लक्ष्य से नहीं डिगा पातीं. यही वजह है कि के इस किसान को आज लोग “कलयुग का सुदामा” कहकर याद कर रहे हैं. उनकी निष्काम भक्ति और त्याग की यह मिसाल पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है





