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ऑफिस की चायपत्ती घर ले गया कर्मचारी, चली गई 17 सालों की नौकरी, अब HC ने दिए बहाली के आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में बोकारो जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) में संविदा पर कार्यरत चपरासी रंजीत कुमार हिमांशु की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने सरकार की कार्रवाई को असंवेदनशील और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए स्पष्ट किया कि मामूली आरोपों पर कठोर दंड देना उचित नहीं है.

संविदा पर कार्यरत रंजीत कुमार हिमांशु पर कार्यालय से चायपत्ती और कुछ बिस्किट घर ले जाने का आरोप लगाया गया था. आरोप के बाद 16 मार्च 2022 को तत्कालीन उप विकास आयुक्त (डीडीसी) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया. हालांकि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-सी सामग्री गायब हुई थी. बाद में रंजीत ने संबंधित सामग्री वापस भी कर दी, लेकिन 2 मई 2022 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई.

न्याय की मांग को लेकर रंजीत ने   हाईकोर्ट का रुख किया. सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कार्यालय में बची हुई चायपत्ती और कुछ बिस्किट घर ले जाने की बात स्वीकार की गई थी तथा नोटिस मिलने के बाद सामग्री लौटा दी गई थी. इसके बावजूद बिना पर्याप्त कारण और विस्तृत जांच के सेवा समाप्त कर दी गई.

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ दंड तय करते समय आरोप और सजा के बीच संतुलन होना आवश्यक है. यदि गलती से सरकारी व्यवस्था को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है, तो सबसे कठोर दंड देना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.

हाईकोर्ट ने डीआरडीए बोकारो को निर्देश दिया है कि रंजीत कुमार हिमांशु को 10 जुलाई से पहले सेवा में बहाल किया जाए तथा 30 जुलाई तक 50 प्रतिशत बकाया वेतन का भुगतान किया जाए.कानूनी जानकारों के अनुसार, यह फैसला केवल एक कर्मचारी की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और समानुपातिक दंड के महत्व को भी रेखांकित करता है. भविष्य में ऐसे मामलों में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा सकता है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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