जुलाई यानी मानसून का महीना चमेली (जैस्मीन) का पौधा लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान नमी और अनुकूल तापमान के कारण पौधे की जड़ें तेजी से विकसित होती हैं और कुछ ही समय में नई शाखाएं निकलने लगती हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपकी बालकनी या छत पर रखा चमेली का गमला सफेद, खुशबूदार फूलों से भर जाए, तो केवल पौधा लगाना ही काफी नहीं है. अनुभवी माली बताते हैं कि सही मिट्टी का मिश्रण, पर्याप्त धूप, समय पर छंटाई और संतुलित जैविक खाद ही भरपूर फूलों का असली राज है. कुछ आसान गार्डनिंग टिप्स अपनाकर आप बिना ज्यादा मेहनत के पूरे मानसून और उसके बाद भी चमेली के पौधे को लगातार फूलों से लदा हुआ रख सकते हैं.
पौधे के लिए सही किस्म का करें चुनाव
पहला कदम सही किस्म का चुनाव करना है. भारत में बालकनियों के लिए, मोगरा (अरबी चमेली) आमतौर पर सबसे आसान और सबसे अच्छा विकल्प होता है क्योंकि यह गर्मी के मौसम में खूब फूल देती है और गमलों में भी आसानी से उग जाती है. अगर आप मजबूत बेल वाली और घनी खुशबू वाली चमेली चाहते हैं तो जूही और बेला भी बेहतरीन विकल्प हैं.
धूप का भी रखें ध्यान
चमेली को धूप बहुत पसंद है, लेकिन भारतीय गर्मियों में दोपहर के समय तेज धूप असहनीय हो सकती है. इसके लिए आप पौधे को ऐसी जगह रखें जहां उसे सुबह की चार से छह घंटे सीधी धूप मिले. इस पौधे के लिए सबसे बेस्ट जगह है बालकनी का ईस्ट फेस साइड. यह एरिया पौधे को दोपहर की तेज धूप से बचाते हुए भरपूर रोशनी देती है. अगर आपकी बालकनी वेस्ट डायरेक्शन की ओर है, तो भीषण गर्मी के दौरान पतले पर्दे का इस्तेमाल करने से पत्तियां झुलसने से बच सकती हैं.
गमले और मिट्टी का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण
चमेली के पौधे के लिए गमले का चुनाव जितना लोग समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. चमेली की जड़ों को तंग जगह पसंद नहीं होती, इसलिए उचित जल निकासी वाले छेदों से युक्त मीडियम साइज से बड़े आकार का गमला ही चुनें. मिट्टी के गमले विशेष रूप से अच्छे होते हैं क्योंकि वे जड़ों को ठंडा रखते हैं. पानी देना ही वह जगह है जहां बालकनी में बागवानी करने वाले अक्सर गलती करते हैं. चमेली को लगातार नमी पसंद है, लेकिन जड़ों में पानी जमा नहीं होना चाहिए. गर्मियों के दौरान, हर सुबह एक बार अच्छी तरह से पानी देना पर्याप्त होता है. अत्यधिक गर्मी में आपको शाम को हल्की फुहार की आवश्यकता हो सकती है, खासकर छोटे पौधों के लिए. अगर पत्तियां पीली पड़ने लगें, तो अक्सर इसका कारण अधिक पानी देना होता है.
इस तरह की खाद का करें प्रयोग
चमेली के पौधे के लिए एक्सपीरियंस बागवानों द्वारा आजमाया गया एक कारगर उपाय है, फूल आने के मौसम में चमेली को नियमित रूप से खाद देना. हर दो से तीन सप्ताह में कम्पोस्ट, पतला समुद्री शैवाल का घोल या जैविक खाद डालने से अधिक फूल खिलते हैं. कुचले हुए केले के छिलके या घर पर बनी कम्पोस्ट चाय भी प्राकृतिक रूप से फूल आने में मदद कर सकती है.
चमेली की छंटाई करने से ना हिचकिचाएं
चमेली के पौधे के लिए छंटाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. कई लोग चमेली की छंटाई करने से हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें फूल खोने का डर होता है, लेकिन हल्की छंटाई वास्तव में पौधों की घनी वृद्धि और अधिक कलियों को बढ़ावा देती है. सूखे तनों और मुरझाए फूलों को नियमित रूप से हटाते रहें. फूल खिलने के बाद हल्की छंटाई करने से पौधे की शाखाएं खूबसूरती से फैलती हैं.
पौधे के लिए नमी बेहद मददगार
नमी भी चमेली के विकास में सहायक होती है. गर्मियों की दोपहर में कंक्रीट की गर्मी के कारण भारतीय बालकनियां अक्सर एक्सट्रीमली ड्राई हो जाती हैं. आस-पास के पौधों को एक साथ रखने से एक छोटा नम वातावरण बनता है, जो चमेली के लिए बहुत फायदेमंद होता है. कुछ माली आसपास की हवा को थोड़ा ठंडा करने के लिए उथले पानी के बर्तन भी रखते हैं.
साल भर खिला रहता है फूल
चमेली की सबसे खास बात यह है कि यह रात में और भी सुगंधित हो जाती है, जिससे छोटी बालकनियां भी शाम के शांत वातावरण में बदल जाती हैं. धैर्य, धूप और नियमित देखभाल से, चमेली का एक पौधा सालों तक लगातार खिल सकता है. और एक बार जब यह आपकी बालकनी में लग जाता है, तो यह शायद ही कभी सिर्फ एक पौधा रह जाता है. यह वातावरण का हिस्सा बन जाता है.





